कानपुर में CMO की कुर्सी को लेकर चल रहे हाई प्रोफाइल ड्रामे में आज उस समय एक निर्णायक मोड़ आ गया जब शासन ने निवर्तमान सीएमओ डॉक्टर उदय नाथ को हटाकर उन्हें उनके पूर्व जनपद श्रावस्ती में अपर सीएमओ के पद पर वापसी का निर्णय लिया यह फैसला हाई कोर्ट से स्टे लाये डॉ हरिदत्त नेमी की रौशनी में लिया गया.

मालूम हो कि 10 जून को कानपुर के CMO ऑफिस में कुर्सी को लेकर हाईप्रोफाइल ड्रामा दूसरे दिन भी चला था. दोपहर करीब 3 बजे वर्तमान सीएमओ डॉ. उदयनाथ ऑफिस पहुंचे. उनके साथ एसीपी चकेरी अभिषेक पांडेय और एडीएम सिटी राजेश सिंह भी थी. भारी पुलिस फोर्स भी ऑफिस के अंदर गया इसके बाद पूर्व सीएमओ हरिदत्त नेमी को ऑफिस से बाहर कर दिया.
बाहर आकर हरिदत्त नेमी ने कहा कि मेरी सीट पर कोर्ट ने स्टे दिया हुआ है. कोर्ट के आदेश पर मैंने जॉइन किया था. इससे पहले गुरुवार सुबह 9.30 बजे DM से भिड़ने वाले निलंबित पूर्व सीएमओ हरिदत्त नेमी ऑफिस पहुंचे. वह सीधे कमरे में गए. वहां CMO की कुर्सी पर बैठ गए. इस दौरान कर्मचारी ने उनके पैर छुए. वहीं, डॉ. उदयनाथ ने एक लेटर जारी कर दिया. इसमें कर्मचारियों को आदेश दिया कि निलंबित सीएमओ से किसी भी फाइल पर साइन नहीं कराएं. उनका कोई आदेश मत मानिएगा.

कैसे शुरू हुआ दो CMO का विवाद: कानपुर के CMO हरिदत्त नेमी को डीएम की संस्तुति पर शासन ने 19 जून को सस्पेंड कर दिया. श्रावस्ती के ACMO डॉ. उदयनाथ को उनकी जगह नया सीएमओ बनाया. नए सीएमओ ने आकर जॉइन कर लिया. सस्पेंड होने के आदेश के खिलाफ हरिदत्त नेमी हाईकोर्ट चले गए. वहां से निलंबन के खिलाफ स्टे ऑर्डर ले गए. स्टे मिलने के बाद वह बुधवार को सीधे सीएमओ ऑफिस पहुंच गए. वहां कुर्सी पर बैठ गए. जब नए सीएमओ ने उन्हें कुर्सी पर बैठा देखा तो कहा- उठिए यहां से. इसके बाद दोनों में हल्की बहस हुई लेकिन, डॉ. नेमी कुर्सी से नहीं हटे. उन्होंने कमरे के बाहर अपनी नेमप्लेट भी लगवा दी. कुर्सी के लिए हुए इस विवाद के बीच आखिरकार उदयनाथ ऑफिस से चले गए.
सरकार चुप क्यों थी ? सूत्रों ने बताया था कि डॉ. नेमी को सस्पेंड किया गया था. हालांकि, वह स्टे ऑर्डर ले गए. ऐसे में मामला कानूनी पेंच में फंस गया. सरकार लीगल एक्सपर्ट से राय ले रही थी. इसके बाद ही आखिर शासन ने अब इस मामले में फैसला ले ही लिया.
















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