सुल्तानपुर डकैती में वांटेड मंगेश यादव का एनकाउंटर करने वाले डीके शाही को वीरता पुरस्कार

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यूपी एसटीएफ के डीएसपी धर्मेश कुमार शाही यानी डीके शाही को वीरता पुरस्कार मिला है. यह वही डीके शाही हैं, जिन्होंने सुल्तानपुर डकैती में वांटेड मंगेश यादव का एनकाउंटर किया था.

डीके शाही को लेकर उस वक्त खूब सियासत हुई. वजह थी- एनकाउंटर स्पॉट पर उनकी एक तस्वीर. इसमें वह चप्पल पहने जवानों के साथ नजर आ रहे.

2 सितंबर 2024 को मंगेश यादव का सुल्तानपुर में एनकाउंटर हुआ था. इसके तुरंत बाद अखिलेश यादव ने कहा था- जाति देखकर मंगेश यादव का एनकाउंटर किया गया. यही नहीं, थोड़े दिन बाद उन्होंने डीके शाही पर भी कमेंट किया था. कहा था- अगर दिमाग होता, तो चप्पल में एनकाउंटर नहीं करते. कोई STF से सवाल पूछेगा. पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर ने भी एनकाउंटर पर सवाल उठाते हुए कहा था- पहली बार चप्पल में एनकाउंटर देखा है.

दरअसल, डीके शाही का नाम यूपी एसटीएफ के तेजतर्रार पुलिस अफसरों में शुमार हैं. मंगेश यादव के अलावा उनके नेतृत्व में कई एनकाउंटर किए गए. डीके शाही के अलावा 16 और पुलिसकर्मियों को गैलेंट्री मेडल यानी वीरता पुरस्कार दिया जाएगा. इनमें 1 IPS, 2 DSP, 3 ASI, 2 इंस्पेक्टर, 7 हेड कॉन्स्टेबल, 2 कॉन्स्टेबल शामिल हैं. गुरुवार सुबह इसकी लिस्ट सामने आई है.

कौन हैं डीके शाही: यूपी पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट से मिली जानकारी के अनुसार, डीके शाही का पूरा नाम धर्मेश कुमार शाही है. 1974 को जन्मे डीके शाही मूल रूप से देवरिया के रहने वाले हैं. साल 2019 में वह डिप्टी एसपी की रैंक पर प्रमोट हुए थे. डीके शाही की पत्नी ऋतु शाही बीजेपी की नेता हैं. मंगेश यादव एनकाउंटर से पहले ऋतु शाही को उत्तर प्रदेश महिला आयोग का सदस्य नियुक्त किया था. डीके शाही ने अब तक 50 से ज्यादा एनकाउंटर किए हैं. पहली बार वह 2004 में चर्चा में आए थे, जब उन्होंने इनामी बदमाश देवेंद्र उर्फ सुल्तान को गिरफ्तार किया था. सुल्तान पर दो सिपाहियों की हत्या का आरोप था और उस पर 1 लाख का इनाम भी रखा गया था.

बदमाशों ने दिनदहाड़े डकैती की वारदात को अंजाम दिया था. सुल्तानपुर में 29 अगस्त, 2024 को भरतजी ज्वेलर्स के शोरूम पर डकैत हुई थी. दोपहर 12 बजे शॉप में भरत सोनी, उनका बेटा और 2 कस्टमर बैठे थे, तभी मुंह पर गमछा बांधे एक बदमाश अंदर आया. अंदर पहुंचते ही उसने भरत सोनी पर हथियार तान दिया. जब तक भरत सोनी कुछ समझ पाते, पीछे से दौड़ता हुआ एक और बदमाश आ गया. वह काले रंग का बैग लिए था.

इसके बाद एक-एक कर 3 बदमाश और अंदर आए. इस तरह पलक झपकते ही बदमाशों ने दुकान को कब्जे में ले लिया था. इसके बाद 3 बदमाश तेजी से सामान समेटने लगे, जबकि 2 असलहा लिए दुकान में मौजूद लोगों को कवर किए रहे. पांचों बदमाशों के हाथ में असलहे थे. मालिक भरत सोनी ने विरोध करने की कोशिश की, तो उनकी कनपटी पर पिस्टल सटा दी. इस दौरान दोनों कस्टमर हाथ जोड़े बैठे रहे थे. डकैती के 7 दिन बाद मंगेश यादव को मार गिराया था.

5 सितंबर की सुबह STF ने इस डकैती में शामिल मंगेश यादव को एनकाउंटर में मार गिराया था. 1 लाख का इनामी मंगेश अंधेरे का फायदा उठाकर भाग रहा था. STF ने उसे घेरा तो वह फायरिंग करने लगा, पुलिस ने जवाबी फायरिंग में उसे गोली मार दी। पुलिस उसे अस्पताल लेकर पहुंची, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. मंगेश जौनपुर बक्सा तहसील के अंगरौरा गांव का रहने वाला था। खबर अपडेट की जा रही है.

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