1983 में नागरिकता ली तो 1980 में कैसे वोटर बन गईं सोनिया गांधी, कांग्रेस नेता के खिलाफ याचिका

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देश में वोटर लिस्ट और चुनाव आयोग को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच खींचतान लंबे समय से चल रही है. अब इसी कड़ी में एक नया मामला हो गया है. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ एक आपराधिक शिकायत दर्ज की गई है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी ने भारतीय नागरिकता लेने से पहले ही मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया. मांग की गई है कि जांच की जाए कि आखिर किस आधार पर सोनिया गांधी ने नागरिक बनने से पहले ही मतदान का अधिकार प्राप्त कर लिया.

फर्जी या गलत दस्तावेजों का इस्तेमाल? असल में सोनिया गांधी पर आरोप हैं कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए फर्जी या गलत दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया है. न्यूज एजेंसी एएनआई यह शिकायत अधिवक्ता विकास त्रिपाठी ने दायर की है. मामले की सुनवाई अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया की अदालत में हुई. अदालत ने शिकायतकर्ता की ओर से पेश की गई दलीलें सुनीं और दर्ज किया कि उनकी ओर से बहस पूरी हो चुकी है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी.

सोनिया गांधी मूल रूप से इटली की नागरिक थीं: कोर्ट में शिकायतकर्ता की तरफ ओर से सीनियर वकील अनिल सोनी और पवन नारंग पेश हुए. नारंग ने तर्क दिया कि यह मामला राजनीतिक नहीं बल्कि कानूनी है और इसमें संज्ञेय अपराध का पहलू सामने आता है जिसकी जांच पुलिस द्वारा की जानी चाहिए. शिकायत के अनुसार सोनिया गांधी मूल रूप से इटली की नागरिक थीं और उन्होंने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता प्राप्त की. लेकिन इससे पहले ही 1981 82 में उनका नाम नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज हो गया था. 

वकील ने अदालत को बताया कि 1982 में सोनिया गांधी और उनके दिवंगत देवर संजय गांधी का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था. केवल भारतीय नागरिक ही मतदाता सूची में शामिल किए जा सकते हैं. नारंग ने दावा किया कि उपलब्ध दस्तावेज इस ओर इशारा करते हैं कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए फर्जी या गलत दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया. 

इतना ही नहीं उन्होंने आरोप लगाया कि एक सार्वजनिक प्राधिकरण को गुमराह किया गया है और धोखाधड़ी की आशंका है. शिकायतकर्ता ने यह भी बताया कि इस मामले को लेकर दिल्ली पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किया गया था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसके बाद अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा.

 एक पुराना मामला भी जोड़ा गया.. रिपोर्ट के मुताबिक याचिका में सोनिया गांधी की नागरिकता से जुड़ा एक पुराना मामला भी जोड़ा गया है. इसमें 1985 में इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला शामिल है. इसमें राकेश सिंह बनाम सोनिया गांधी केस में यह कहा गया था कि सोनिया गांधी 30 अप्रैल 1983 को नागरिकता अधिनियम की धारा 5 के तहत भारतीय बनीं. 

मौजूदा याचिका में दलील दी गई है कि 1983 से पहले उनका मतदाता सूची में नाम दर्ज होना गैरकानूनी था. शिकायतकर्ता ने अदालत से मांग की है कि पुलिस को एफआईआर दर्ज कर जांच करने निर्देश दिया जाए. साथ ही चुनाव आयोग के उस समय के रिकॉर्ड मंगाने और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल करने का निर्देश दिया जाए. अदालत अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2025 को करेगी.

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