बहुजन समाज पार्टी, बसपा प्रमुख मायावती ने शनिवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए साधु-संतों को गलत बयानबाजी न करने और विवादित बयानों से बचने की सलाह दी है. हाल ही में जगद्गुरु रामभद्राचार्य के बाबा साहेब अंबेडकर पर टिप्पणी करने पर मायावती ने नाराजगी जाहिर की है. हालांकि अपनी पोस्ट में मायावती ने किसी का नाम नहीं लिया है. उन्होंने कहा है कि बिना जानकारी किसी भी तरह की गलत बयानबाजी करने के बजाय वे चुप रहें तो उचित होगा.
मायावती ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि जैसा कि विदित है कि आएदिन सुर्ख़ियों में बने रहने हेतु विवादित बयानबाज़ी करने वाले कुछ साधु-सन्तों को परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के भारतीय संविधान के निर्माण में रहे उनके अतुल्य योगदान के बारे में सही जानकारी नहीं होने के कारण इनको इस बारे में कोई भी ग़लत बयानबाज़ी आदि करने की बजाय यदि वे चुप रहें तो यह उचित होगा.
मायावती ने ये भी कहा कि साथ ही, बाबा साहेब के अनुयायी, मनुस्मृति का विरोध क्यों करते हैं? उसे भी इनको अपनी जातिवादी द्वेष की भावना को त्याग कर ज़रूर समझना चाहिये. इसके साथ-साथ, इन्हें यह भी मालूम होना चाहिये कि बाबा साहेब महान् विद्वान व्यक्तित्व थे। इस मामले में कोई भी टीका-टिप्पणी करने वाले साधु-सन्त, इनकी विद्वता के मामले में कुछ भी नहीं हैं. अतः इस बारे में भी कुछ कहने से पहले इनको ज़रूर बचना चाहिये, यही नेक सलाह.
दरअसल, जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि डॉ. अंबेडकर को संस्कृत नहीं आती थी और यदि उन्हें आती, तो वे मनुस्मृति का अपमान नहीं करते.















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