प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी समारोह में राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को दर्शाने वाला एक बड़ा कदम उठाया. भारत सरकार ने विशेष रूप से डिजाइन स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी किया, जिस पर संघ के स्वयंसेवक दिखाई देते हैं. पीएम ने बताया कि भारत सरकार ने जो 100 रुपये का सिक्के जारी किया है उस पर एक ओर राष्ट्रीय चिह्न है और दूसरी तरफ सिंह के साथ वरद-मुद्रा में भारत माता की छवि है और समर्पण भाव से नमन करते स्वयंसेवक दिखाई दे रहे हैं. पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि भारतीय मुद्रा पर भारत माता की तस्वीर संभवत: स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है. यह सुनते ही सभागार में बैठे स्वयंसेवकों और संघ पदाधिकारियों ने जोरदार तरीके से तालियां बजाईं.
पीएम ने कहा कि सिक्के के ऊपर संघ का बोध वाक्य भी अंकित है- राष्ट्राय स्वाहा, इदं राष्ट्राय इदं न मम. उन्होंने कहा कि आज जो विशेष स्मृति डाक टिकट जारी हुआ है उसकी भी एक महत्ता है. हम सभी जानते हैं कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड की कितनी अहमियत होती है. 1963 में आरएसएस के स्वयंसेवक भी 26 जनवरी की राष्ट्रीय परेड में शामिल हुए थे और उन्होंने आन बान शान से राष्ट्रभक्ति की धुन पर कदमताल किया था. इस टिकट में उसी ऐतिहासिक क्षण की स्मृति है.
पीएम ने कहा कि संघ के स्वयंसेवक अनवरत रूप से देश की सेवा में जुटे हैं, समाज को सशक्त कर रहे हैं इसकी भी झलक इस स्मारक डाक टिकट में है. मैं इस स्मृति चिह्न और डाक टिकट के लिए देशवासियों को बधाई देता हूं.
जैसे नदियों के किनारे, वैसे संघ…
प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस तरह विशाल नदियों के किनारे मानव सभ्यताएं पनपती हैं उसी तरह संघ के किनारे भी और संघ की धारा में भी सैकड़ों जीवन पुष्पित-पल्लवित किए हैं. जैसे कोई नदी जिन रास्तों से गुजरती है उन क्षेत्रों को, वहां की भूमि को अपने जल से समृद्ध करती जाती है, वैसे ही संघ ने इस देश के हर क्षेत्र, हर आयाम को स्पर्श किया है. यह अविरल तप का फल है. यह राष्ट्र प्रवाह प्रबल है.
संघ की धारा अनेक, लेकिन विरोधाभास नहीं
मोदी ने कहा कि जिस तरह एक नदी कई धाराओं में खुद को प्रकट करती है और हर धारा अलग-अलग क्षेत्र को पोषित करती है. संघ की यात्रा भी ऐसी ही है. संघ के अलग-अलग संगठन भी जीवन के हर पक्ष से जुड़कर राष्ट्र की सेवा करते हैं. पीएम ने कहा कि संघ की एक धारा अनेक धारा तो बनती गई लेकिन उनमें कभी विरोधाभास पैदा नहीं हुआ क्योंकि हर धारा का विविध क्षेत्र में काम करने वाले हर संगठन का भाव एक ही है- राष्ट्र प्रथम.
















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