भाजपा ने नितिन नवीन को ही क्यों बनाया राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, 5 प्वाइंट्स में समझिए

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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने युवा नेता नितिन नवीन को रविवार को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। नवीन बिहार की नीतीश सरकार में मंत्री हैं और पांच बार से विधायक हैं। अभी वह बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट से विधानसभा पहुंचे हैं। भाजपा ने नितिन नवीन को कार्यकारी अध्यक्ष पद के लिए चुनकर सभी को चौंका दिया है। सूत्रों के अनुसार, अगले महीने उनके पद में लगा कार्यकारी हट सकता है, जिसके बाद जेपी नड्डा की जगह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हो जाएंगे। नितिन नवीन की उम्र महज 45 साल है और उन्हें सरकार के साथ-साथ संगठन का भी अच्छा-खास अनुभव है। भाजपा आलाकमान ने नितिन नवीन को ही क्यों यह अहम जिम्मेदारी सौंपी है, पांच प्वाइंट में समझिए।

युवा चेहरा हैं नवीन: नितिन की उम्र महज 45 साल है, जिसके चलते भी जब उनके नाम का ऐलान हुआ तो भाजपा कार्यकर्ता व लोग हैरान रह गए। पार्टी के इस फैसले के पीछे भी एक अहम रणनीति है। दरअसल, पिछले एक दशक में भाजपा से बड़ी संख्या में युवाओं का जुड़ाव हुआ है। सोशल मीडिया के इस दौर में युवाओं की राजनीति में अहम भूमिका हो गई है और महिलाओं, बुजुर्गों के साथ-साथ भाजपा आलाकमान ने हमेशा ही चुनावों में युवाओं का खास ध्यान रखा है। भाजपा का दावा रहा है कि देश का युवा या फिर जेन-जी हमेशा से ही पीएम मोदी से खुद को आसानी से कनेक्ट करता रहा है। नितिन को इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपे जाने के पीछे भाजपा में अब हो रहे जेनरेशनल शिफ्ट को भी दर्शता है और इसके जरिए पार्टी युवाओं पर फोकस बनाए रखना चाहती है।

साफ छवि, कोई विवाद नहीं: विभिन्न दलों में ऐसा नेता होते हैं जो सुर्खियों में आने के लिए विवादित बयानबाजी करते नहीं थकते, लेकिन नितिन ऐसे नेताओं में नहीं हैं, जो विवादित बयानबाजी करके चर्चा में आएं। भले ही पांच बार से वे विधायक हों, लेकिन छवि साफ-सुथरी है। अपने क्षेत्र में घर-घर उनकी पहचान है। कार्यकारी अध्यक्ष बनाने के लिए भाजपा आलाकमान को ऐसे ही किसी नेता की जरूरत थी, जिसे न सिर्फ संगठन और सरकार, दोनों का अनुभव हो, बल्कि उसकी छवि भी साफ-सुथरी हो, जिससे बाद में विपक्षी दल उसके पुराने बयानों को ढूंढकर निशाना न बना सकें। उनकी छवि शांत, सौम्य और बिना विवादों में आए अपने कार्य को निरंतर करते रहने वाली है।

नवीन के पास संगठन का भी है लंबा अनुभव: युवा अवस्था से ही भाजपा से जुड़े नवीन को संगठन का भी अच्छा खासा अनुभव है। बिहार में मंत्री होने के साथ-साथ वह अभी छत्तीसगढ़ के प्रभारी भी हैं। 2016 से 2019 तक नवीन बिहार में भाजपा युवा मोर्चा के प्रमुख रह चुके हैं, जबकि 2019 से 2023 तक वे युवा मोर्चा के महासचिव रहे। इसके बाद 2023 से 2024 तक वह छत्तीसगढ़ में भाजपा के सह-प्रभारी रहे और इसी दौरान उनके कार्यकाल में भाजपा ने उस छत्तीसगढ़ में जीत दर्ज की, जहां भूपेश बघेल को हराना काफी मुश्किल माना जा रहा था। तमाम चुनावी सर्वे में कांग्रेस की जीत दिखाई जा रही थी, लेकिन यहां उन्होंने अपने संगठनात्मक कौशल से पार्टी को बड़ी जीत दिलाई। इसके बाद 2024 में उन्हें इसका लाभ भी मिला और भाजपा ने उन्हें छत्तीसगढ़ का प्रभारी बना दिया।

सरकारी कामकाज का भी लंबा अनुभव: नितिन नवीन भले ही युवा हों, लेकिन संगठन से लेकर सरकार के कामकाज का उन्हें लंबा अनुभव है, जिससे उन्हें बतौर कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष भी फायदा मिलने वाला है। विभिन्न राज्यों में भाजपा सरकार और संगठन के साथ तालमेल की जिम्मेदारी वह अच्छी तरह से निभा सकेंगे। पहली बार फरवरी, 2021 में वह नीतीश सरकार में मंत्री बने और फिर मार्च 2024 से फरवरी 2025 तक मंत्री रहे। इसके बाद वर्तमान नीतीश कैबिनेट में सड़क निर्माण मंत्री हैं।

हमेशा से ही भाजपा से रहा जुड़ाव: पिछले एक दशक में कांग्रेस समेत दूसरे दलों से गए नेताओं को भाजपा आलाकमान ने बड़ी जिम्मेदारी दी है। कभी हिमंत बिस्वा सरमा जैसे नेताओं को असम का सीएम बनाया तो कभी सुनील जाखड़, जितिन प्रसाद समेत तमाम कांग्रेसियों को अहम जिम्मेदारी दी गई, लेकिन जुलाई में हुए जगदीप धनखड़ मामले के बाद सवाल उठने लगे कि उच्च पदों पर भाजपा और संघ से जुड़ाव रखने वालों को ही जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। पिता नवीन किशोर सिन्हा के भाजपा का दिग्गज नेता होने के चलते नितिन नवीन का भी बचपन से ही भाजपा और संघ से जुड़ाव बना रहा और वे पार्टी की अहम बैठकों में जाते रहे। अब आलाकमान ने उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर कैडर से जुड़े व्यक्ति को अहम पद के लिए नियुक्त कर दिया।

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