BMC चुनाव के नतीजों का ऐलान जारी है. बीएमसी समेत 20 नगरपालिकाओं में भाजपा की लहर नजर आ रही है. वहीं, कांग्रेस लातूर और चंद्रपुर में मजबूत बनी हुई है. बृह्नमुंबई महानगरपालिका समेत महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं में चुनाव गुरुवार को हुए थे. इसके बाद शाम 5 बजे तक अंतिम नतीजे जारी हो सकते हैं. खास बात है कि बीएमसी में करीब 9 साल के बाद चुनाव हुए हैं. अधिकारियों का कहना है कि 2026 के चुनावों ने 2017 में हुई वोटिंग के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं.
मुंबई ही क्यों BJP की प्रचंड लहर पूरे महाराष्ट्र में चलती दिख रही है. वैसे नागपुर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गढ के तौर पर देखा जाता है. इसी शहर से संघ की स्थापना हुई थी और यहीं पर उसका मुख्यालय भी बीते 100 सालों से है. इसलिए भाजपा भी यहां जीत की उम्मीद रखती रही है.

शुक्रवार को आए निकाय चुनाव के नतीजों में में भाजपा की यह उम्मीद सिरे चढ़ती दिख रही है. अब तक आए रुझानों में कुल 151 वार्डों में से 94 पर अकेले भाजपा ही आगे है. अब तक 129 सीटों के ही रुझान सामने आए हैं. इसलिए माना जा रहा है कि कुल 151 सीटों के रुझान आने तक भाजपा अपने ही दम पर सेंचुरी लगा सकती है. वहीं भाजपा की सहयोगी एकनाथ शिंदे की शिवसेना को अब तक 2 सीटों पर ही बढ़त मिली है.
यह शहर इसलिए भी अहम है क्योंकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यहीं के हैं और नितिन गडकरी भी इसी शहर से सांसद हैं. अब तक के रुझानों में एनसीपी को महज 1 सीट पर बढ़त है. इसके अलावा कांग्रेस 31 सीटों पर लीड के साथ दूसरे नंबर पर है लेकिन हालात ऐसे हैं कि भाजपा के मुकाबले कोई भी दूर-दूर तक नहीं दिख रहा है. उद्धव ठाकरे की शिवसेना को तो सिर्फ एक ही सीट पर बढ़त मिली है. भाजपा को बीएमसी में भी बड़ा फायदा होता दिख रहा है और दशकों के बाद ठाकरे परिवार का वर्चस्व मुंबई की सत्ता से खत्म हो जाएगा.
पुणे और बीएमसी में भी भाजपा की लहर, उद्धव और पवार पस्त बीएमसी में भाजपा 65 सीटों पर आगे है, जबकि शिंदे की शिवसेना 18 पर आगे चल रही है. उद्धव ठाकरे की शिवसेना 52 सीटों पर आगे चल रही है और कांग्रेस को महज 11 सीटों पर ही लीड है. अब बात पुणे की करें तो यहां भी नागपुर जैसे ही हालात हैं. भाजपा गठबंधन को अब तक 47 सीटों पर लीड मिली है, जबकि शरद पवार और अजित पवार की एनसीपी मिलकर भी 15 सीटों पर ही आगे हैं. कांग्रेस को तो 4 सीटों पर ही बढ़त मिल पाई है. उद्धव ठाकरे की शिवसेना सिर्फ एक सीट पर आगे चल रही है.
बता दें कि पुणे में अपनी ताकत ज्यादा बताते हुए अजित पवार गठबंधन से अलग राह पर चले थे. अब जो रुझान हैं, वह पवार परिवार को झटका देने वाले हैं.
















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