सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि को बेहद पवित्र और खास माना गया है. शास्त्रों के मुताबिक यह तिथि पितृ देव को भी समर्पित होती है. यही वजह है पितृ पक्ष के दौरान इस तिथि पर पूर्वजों के निमित्ति श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान इत्यादि अनुष्ठान किए जाते हैं. मान्यता है कि पूर्णिमि तिथि पर पूर्वजों के निमित्ति इन कार्यों को करने से पितृ देव प्रसन्न होते हैं. शास्त्रों के जानकार बताते हैं कि पितृ दोष को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि इसका प्रभाव सात पीढ़ियों तक देखने को मिलता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब किसी जातक की कुंडली में पितृ दोष उत्पन्न होता है, तो शारीरिक, मानसिक और आर्थिक तीनों प्रकार के परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में अगर आप भी पितृ दोष से पीड़त हैं तो वैशाख मास की पूर्णिमा आपके लिए वरदान साबित हो सकती है, क्योंकि इस दिन किए गए उपायों से पितृ देव जल्द ही प्रसन्न होते हैं.आइए जानते हैं कि वैशाख पूर्णिमा पर किन उपायों को करने से पितृ दोष दूर हो सकता है.
वैशाख पूर्णिमा 1 मई शुक्रवार को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि का आरंभ 30 अप्रैल की रात्रि 9:12 बजे से होगा और इसका समापन 1 मई की रात्रि 10:52 बजे पर होगा। उदयातिथि के अनुसार 1 मई को स्नान, व्रत, पूजन और दान-पुण्य करना शुभ रहेगा।
पूर्वजों के निमित्त करें तर्पण: शास्त्रों के अनुसार, पूर्णिमा तिथि पूर्वजों की कृपा पाने और पितृ दोष दूर करने के लिए खास होती है. ऐसे में इस दिन पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण करें. इसके लिए जल में दूध, सफेद फूल और काले तिल मिलाकर तर्पण करें. मान्यता है कि इस दिन पूर्वजों के निमित्त ये काम करने से पितृ दोष दूर होता है.
पीपल वृक्ष की पूजा से पितृ होंगे प्रसन्न: पौराणिक मान्यता है कि पीपल के वृक्ष में देवता और पितर दोनों का वास होता है. यही वजह है कि पितृ पक्ष के दौरान पीपल के वृक्ष की पूजा की जाती है. ऐसे में कुंडली के पितृ दोष को दूर करने के लिए पूर्णिमा के दिन पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं और उसकी 7 बार परिक्रमा करें. इसके अलावा इस दिन एक दीये में सरसों का तेल और काले तिल डालकर पीपल के नीचें रखें. वैशाख पूर्णिमा के दिन ऐसा करने पर पितृ देव प्रसन्न होंगे और कुंडली का पितृ दोष जल्द ही दूर हो जाएगा.
दक्षिण दिशा में जलाएं पितरों के निमित्त दीया: ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के मुताबिक, दक्षिण दिशा पितरों को समर्पित होती है. मान्यता है कि इस दिशा में पितृ देव वास कहते हैं. इसलिए वैशाख पूर्णिमा पर शाम के वक्त घर की दक्षिण दिशा में सरसों या तिल के तेल का दीया जलाएं. साथ ही पितृ देव से अपनी गलतियों के लिए माफी मांगे.
सेवा और दान करने से दूर होगा पितृ दोष: पूर्णिमा के दिन दान और सेावा का विशेष महत्व होता है. कहा जाता है कि इस दिन दान और सेवा करने से पितृ देव प्रसन्न होते है, जिसके परिणामस्वरूप कुंडली का पितृ दोष जल्द ही दूर हो जाता है. ऐसे में वैशाख पूर्णिमा पर जरूरतमंदों को भोजन कराएं. इसके साथ ही इस दिन काले वस्त्र, काले तिल और काली उड़द का दान करें. इसके अलावा इस दिन कौए, गाय और कुत्तों को भी भोजन कराएं.
करें इन मंत्रों का जाप: कुंडली के पितृ दोष को दूर करने के लिए उपायों के साथ-साथ विशेष मंत्रों का जाप भी सहायक होता है. ऐसे में वैशाख पूर्णिमा के दिन ‘ॐ पितृभ्यः नमः’ या ‘ॐ श्री सर्व पितृ देवताभ्यो नमो नमः’ का जाप करें. इसके साथ ही शिवलिंग पर काले तिल और जल अर्पित करें. मान्यता है कि पूर्णिमा तिथि पर ऐसा करने से पूर्वज प्रसन्न होकर पितृ दोष से मुक्ति कर देते हैं.
















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