हर महीने 2 चतुर्थी व्रत रखे जाते हैं, इस तरह साल में 24 चतुर्थी होती हैं. लेकिन साल 2026 खास है क्योंकि इसमें अधिकमास पड़ने से 2 चतुर्थी ज्यादा होंगी. इसमें से वरदा चतुर्थी व्रत रखा जा चुका है और अब विभुवन चतुर्थी व्रत रखा जाएगा. चूंकि यह चतुर्थी 3 साल में आती हैं इसलिए इनका विशेष महत्व है.
पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि आज 3 जून 2026 की रात 9 बजकर 22 मिनट पर आरंभ होगी और 4 जून, गुरुवार की रात 11 बजकर 30 मिनट पर समाप्त होगी. उदयातिथि के आधार पर विभुवन संकष्टी चतुर्थी व्रत 3 जून को रखा जाएगा. वहीं चंद्रोदय रात 10 बजकर 04 मिनट पर होगा.
विभुवन संकष्टी चतुर्थी पर पूजा मुहूर्त
लाभ चौघड़िया : सुबह 5 बजकर 23 मिनट से लेकर 7 बजकर 7 मिनट तक
अमृत चौघड़िया : सुबह 7 बजकर 7 मिनट से लेकर 8 बजकर 51 मिनट तक
शुभ चौघड़िया : सुबह 10 बजकर 35 मिनट से लेकर 12 बजकर 19 मिनट तक
विभुवन संकष्टी चतुर्थी पर ऐसे करें पूजा
संकष्टी चतुर्थी की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, संभव हो तो लाल या पीले कपड़े पहनें. फिर गणेश जी का स्मरण करते हुए व्रत और पूजा का संकल्प लें. पूजा की तैयारी करें. इसके लिए लकड़ी की चौकी पर लाल या फिर पीले रंग का वस्त्र बिछाकर गणेश जी की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें.
गणेश जी की फूल, माला, दूर्वा, सिंदूर, अक्षत, हल्दी से पूजा करें. सच्चे मन से 11 जोड़े दूर्वा चढ़ाएं. लड्डू-मोदक का भोग लगाएं. घी का दीपक और धूप जलाएं. इसके बाद गणेश चालीसा, गणेश स्तुति और मंत्र जाप करें. विभुवन संकष्टी चतुर्थी व्रत की कथा पढ़ें, गणेश जी की आरती करें. पूरे दिन व्रत रखें और फिर शाम को चंद्रोदय होने पर चंद्र देव को अर्घ्य देकर पूजा करें. इसके बाद प्रसाद और सात्विक भोजन करके व्रत का पारण करें.
















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