ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि जयंती हर साल ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है. मान्यता है कि इसी दिन सूर्य देव और छाया के संयोग से शनिदेव का जन्म हुआ था. इसलिए यह दिन शनिदेव की उपासना और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए बेहद खास माना जाता है. इस साल शनि जयंती 16 मई को मनाई जाएगी. इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और उपाय करने से शनि दोष, साढ़ेसाती या ढैय्या से जुड़ी परेशानियों में राहत मिल सकती है.
शनि जयंती शुभ मुहूर्त: द्रिक पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 16 मई की सुबह 5 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 17 मई को अर्धरात्रि में रात 1 बजकर 30 मिनट पर समाप्त होगा. ऐसे में 16 मई को ही शनि जयंती और शनि अमावस्या मनाई जाएगी.
कैसे करें शनि जयंती की पूजा? शनि जयंती के दिन पूजा का सबसे शुभ समय संध्या काल माना गया है. इसलिए कोशिश करें कि आप शाम के समय ही पूजा करें.
➤सबसे पहले संध्या समय स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनें.
➤इसके बाद शनिदेव का ध्यान करते हुए पश्चिम दिशा की ओर मुख करके बैठें.
➤फिर शनि मंत्र या शनि स्तोत्र का श्रद्धा से पाठ करें.
➤पूजा के बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं.
➤अपनी क्षमता के अनुसार किसी जरूरतमंद को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें.
क्या रखें खास ध्यान? इस दिन सात्विक भोजन करना शुभ माना जाता है. कई लोग शनि जयंती पर व्रत भी रखते हैं, ऐसे में आप अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रख सकते हैं. मान्यता है कि शनि जयंती पर सच्चे मन से की गई पूजा और उपाय जीवन में चल रही बाधाओं को कम करने में मदद कर सकते हैं और शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है.
















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