पुरुषोत्तम महीना और एकादशी तिथि दोनों ही भगवान विष्णु को समर्पित हैं. मई में मलमास की पहली एकादशी पड़ रही है, जिसे पद्मिनी एकादशी और कमला एकादशी कहते हैं. इस एकादशी के महत्व का वर्णन पद्म पुराण में किया गया है.
इसके मुताबिक 3 साल में आने वाले पुरुषोत्तम महीने की इस एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है. साथ ही तुलसी के पास बैठकर किए गए जप का एक लाख गुना ज्यादा फल प्राप्त होता है. जो अपार धन-समृद्धि देता है.
मई में कब है पद्मिनी एकादशी? पंचांग के अनुसार, अधिक मास या पुरुषोत्तम महीने की पहली एकादशी 27 मई को सुबह 6 बजकर 22 मिनट पर प्रारंभ होगी और 28 मई को सुबह 7 बजकर 22 मिनट पर समाप्त होगी. कमला एकादशी या पद्मिनी एकादशी का व्रत 27 मई 2026, बुधवार को रखा जाएगा और अगले दिन 28 मई 2026, गुरुवार को पारण किया जाएगा..
कमला एकादशी या पद्मिनी एकादशी का महत्व: पुरुषोत्तम महीने की एकादशी का व्रत रखने से व्रती को श्री या लक्ष्मी की प्राप्ति होती है. यानी कि धन बढ़ता है, सुख और सम्मान बढ़ता है. बुरे से बुरे दिन खत्म होते हैं और सौभाग्य जागता है. पद्म पुराण के अनुसार यह व्रत रखने के कई लाभ हैं.
➤कमला एकादशी का व्रत करने से धन बढ़ता है.
➤ भगवान विष्णु के मंत्र या नाम का जप करने से कई गुना फल की प्राप्ति होती है. पद्म पुराण के अनुसार, इस दिन घर पर भगवान विष्णु का जप करने से एक गुना फल प्राप्त होता है.
➤नदी के तट पर जप करने से दोगुना, गौशाला में जप करने पर सहस्त्र गुना, अग्निहोत्र गृह में जप करने से एक हजार एक सौ गुना, शिवजी के मंदिर में जप करने से 10 हजार गुना, तीर्थ में या तुलसी के पौधे के पास बैठकर जप करने से समीप लाख गुना फल की प्राप्ति होती है.
➤भगवान विष्णु के मंदिर में जप करने से अनंत गुना फल प्राप्त होता है.
जप करने की विधि: एकादशी के दिन स्नान करके साफ कपड़े पहनें. जप स्थल को पवित्र करें. आसन पर बैठें और सच्चे मन से भगवान विष्णु के मंत्र या नाम का जप करें. कोशिश करें कि ऐसे स्थान पर बैठकर जप करें जहां शांति या एकांत हो.
















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