आज शनि जयंती, वट सावित्री और ज्‍येष्‍ठ शनि अमावस्‍या का दुर्लभ संयोग, जानें पूरी जानकारी

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आज ज्‍येष्‍ठ महीने की अमावस्‍या है, इसी दिन शनि देव का प्राकट्य दिवस मनाया जाता है, वट सावित्री व्रत रखा जाता है. इस साल जेठ अमावस्‍या शनिवार को पड़ने से और भी खास हो गई है. धर्म-ज्‍योतिष में शनि अमावस्‍या को विशेष माना गया है. यह दिन शनि देव को प्रसन्‍न करने के लिए खास होता है-

आज ज्येष्ठ मास की अमावस्या है और आज के ही दिन शनि जयंती मनाई जा रही है. हिंदू धर्म में शनि देव को कर्मफल दाता और न्याय का देवता माना जाता है.  मान्यता है कि आज ही के दिन सूर्य पुत्र शनि देव का जन्म हुआ था. आज शनिवार का दिन होने के कारण इस जयंती का महत्व अनंत गुना बढ़ गया है, क्योंकि शनिवार स्वयं शनि देव को समर्पित है.

1. आज का शुभ मुहूर्त: आज 16 मई को पूजा के लिए कई शुभ संयोग बन रहे हैं. ज्योतिष गणना के अनुसार अमावस्या तिथि का विवरण इस प्रकार है:

➤अमावस्या तिथि का आरंभ: 15 मई 2026 को दोपहर से. 
➤अमावस्या तिथि का समापन: आज 16 मई 2026 को शाम 05:40 बजे तक. 
➤अमृत काल (पूजा के लिए श्रेष्ठ): सुबह 09:15 से 10:45 तक. 
➤संध्या काल पूजा: शाम 06:30 से रात 08:30 तक (शनि देव की पूजा सूर्यास्त के बाद विशेष फलदायी होती है.

2. शनि जयंती पूजा विधि: आज के दिन शनि देव की कृपा पाने के लिए भक्त इन चरणों का पालन करें.

ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: आज सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी या घर के पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें. 

संकल्प: हाथ में जल लेकर शनि देव के व्रत या विशेष पूजा का संकल्प लें. 

मंदिर दर्शन: पास के शनि मंदिर जाएं. यदि मंदिर जाना संभव न हो, तो घर के पश्चिम कोने में एक चौकी पर काला कपड़ा बिछाकर शनि देव की यंत्र या प्रतिमा स्थापित करें. 

तैल अभिषेक: शनि देव की शिला या प्रतिमा पर सरसों का तेल अर्पित करें. ध्यान रहे कि तेल चढ़ाते समय उनकी आंखों में न देखें, बल्कि चरणों की ओर दृष्टि रखें. 

नैवेद्य: उन्हें नीले फूल, काले तिल, अक्षत और भोग में इमरती या काली उड़द की खिचड़ी अर्पित करें. 

मंत्र जाप: आज कम से कम 108 बार “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः” इस मंत्र का जाप करें. 

3. शनि दोष से मुक्ति के अचूक उपाय: अगर आपकी कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या शनि दोष है, तो आज 16 मई को ये उपाय जरूर करें. 

पीपल के पेड़ की पूजा: आज शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं और सात बार परिक्रमा करें. 

छाया दान: एक कटोरी में सरसों का तेल लें, उसमें अपना चेहरा देखें, फिर उस तेल को दान कर दें या मंदिर में रख आएं. 

हनुमान जी की भक्ति: शनि देव ने हनुमान जी को वचन दिया था कि वह उनके भक्तों को परेशान नहीं करेंगे. इसलिए आज हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ अवश्य करें. 

4. क्या दान करें? आज के दिन दान का फल कई जन्मों तक मिलता है. इन वस्तुओं का दान करना शुभ है. 

काले वस्त्र और छाता.  लोहे के बर्तन या जूते-चप्पल. काली उड़द की दाल और काले तिल. जरूरतमंदों और कुष्ठ रोगियों को भोजन कराना. 

5. राशि अनुसार विशेष लाभ: आज का दिन विशेष रूप से कुंभ, मकर और मीन राशि (साढ़ेसाती के प्रभाव वाली), कर्क और वृश्चिक राशि (ढैय्या के प्रभाव वाली) के जातकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है.  इन राशियों के जातकों को आज सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए ताकि शनि देव के प्रतिकूल प्रभाव कम हो सकें.

आज ही वट सावित्री व्रत रखा जा रहा है. पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाने वाला यह व्रत कई सुहागिनें निर्जला रखती हैं. वहीं कई महिलाएं व्रत में फलाहार का सेवन करती हैं.

वट सावित्री व्रत शुभ मुहूर्त: इस बार ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 16 मई यानी आज सुबह से शुरू हो रही है, इसलिए उदया तिथि के अनुसार व्रत इसी दिन रखा जाएगा. अमावस्या तिथि की शुरुआत 16 मई यानी आज सुबह 05 बजकर 11 मिनट से शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन 17 मई यानी रात 01 बजकर 30 मिनट पर होगा.

वट सावित्री की पूजा के लिए सबसे उत्तम पूजा मुहूर्त सुबह 07 बजकर 12 मिनट से सुबह 08 बजकर 24 मिनट तक रहेगा. अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक रहेगा.

व्रती महिलाएं जान लें कि फलाहार में कौन सी चीजें खाना सही माना जाता है. वरना गलत चीज का सेवन करने से व्रत टूट सकता है या खंडित हो सकता है. खासतौर पर जो महिलाएं पहली बार वट सावित्री व्रत कर रही हैं, उनमें इसे लेकर काफी कन्‍फ्यूजन रहता है कि व्रत में क्‍या खाया जाता है?

वट सावित्री व्रत में क्या खाया जाता है? वट सावित्री व्रत में हल्का और सात्विक भोजन करना चाहिए. बेहतर है कि मौसमी फल खाकर ही व्रत रखा जाए. इसमें – आम, लीची, तरबूज और खरबूजा खाना अच्‍छा रहेगा. इन फलों में काफी मात्रा में पानी होता है, जो शरीर को हाइड्रेट रखेगा और ऊर्जा भी देगा. इसके अलावा दूध, दही, मखाना, मूंगफली और सूखे मेवे का सेवन भी किया जा सकता है.

वैसे इस व्रत को लेकर अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग परंपराएं हैं. कुछ जगहों पर वट सावित्री व्रत में महिलाएं गुड़ और आटे से बनी मीठी पूरियां और चने का भोग लगाती हैं और फिर स्‍वयं वह प्रसाद ग्रहण करती हैं. वहीं कई महिलाएं सिंघाड़े और कुट्टू के आटे से बने पकवान खाती हैं. कुछ महिलाएं वट सावित्री व्रत की पूजा के बाद सात्विक भोजन करती हैं. बेहतर है कि इस दिन नमक न खाएं और यदि खाएं तो सेंधे नमक का ही सेवन करें. ध्‍यान रखें कि प्रसाद और भोजन घी में ही बना हुआ हो. व्रत में तेल का उपयोग करने से बचें. सरसों के तेल का इस्‍तेमाल तो बिल्‍कुल न करें.

वट सावित्री व्रत में पानी कब पीना चाहिए? वहीं जो महिलाएं निर्जला व्रत रख रही हैं, उनके लिए भी कुछ नियम हैं. यदि पूरे दिन का निर्जला व्रत रखा है तो अगले दिन स्‍नान-पूजा के बाद ही पानी पीकर व्रत खोलें. यदि ऐसा संभव नहीं है तो वट वृक्ष की पूजा करने और कथा सुनने के बाद शाम को पानी पी सकती हैं.

भूलकर भी न खाएं ये चीजें: वट सावित्री व्रत के दिन गलती से भी तामसिक भोजन न करें. जैसे- मांस-मदिरा, प्याज, लहसुन, चावल और सामान्य नमक आदि. ऐसा करने से व्रत टूट जाता है. साथ ही पाप भी लगता है.

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