पुनीत शुक्ला, कानपुर।
कानपुर नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट गुरुवार दोपहर हैक हो गई. घटना की जानकारी मिलते ही नगर निगम से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मच गया. वेबसाइट ठप होने से नगर निगम की कई ऑनलाइन सेवाएं खासतौर पर टेंडर प्रक्रिया संबंधी जरूरी काम पूरी तरह प्रभावित हो गई हैं. सरकारी वेबसाइट हैक होने से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है. इंजीनियर वेबसाइट को रिकवर करने और ठीक करने में जुटे हैं.
इस हाई-प्रोफाइल साइबर हमले के बाद कानपुर से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक के प्रशासनिक गलियारों और आईटी (IT) महकमे में हड़कंप मच गया है. सरकारी वेबसाइट के हैक होते ही नगर निगम से जुड़ी तमाम ऑनलाइन जनहित सेवाएं पूरी तरह चरमरा गईं, जिससे आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

एनआईसी के इंजीनियरों में खलबली: जैसे ही वेबसाइट के हैकिंग की भनक लगी, सरकारी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का संचालन और रखरखाव करने वाली देश की सबसे बड़ी एजेंसी, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के इंजीनियरों की टीम तुरंत अलर्ट मोड पर आ गई. दिल्ली और लखनऊ के वरिष्ठ आईटी विशेषज्ञों व इंजीनियरों की फौज इस तकनीकी सेंधमारी को ठीक करने और वेबसाइट को दोबारा बहाल करने में जुट गई है. हालांकि, साइबर हमला इतना तगड़ा है कि खबर लिखे जाने तक वेबसाइट को पूरी तरह चालू नहीं किया जा सका था.
जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र से लेकर कर्मचारियों का वेतन तक अटका: नगर निगम की मुख्य वेबसाइट हैक होने के कारण इसका सबसे बड़ा और सीधा असर आम जनता से जुड़ी बुनियादी डिजिटल सेवाओं पर पड़ा है. अधिकारियों के मुताबिक, वेबसाइट ठप होने से सबसे ज्यादा जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है. सैकड़ों लोग अस्पतालों और दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं.

नगर निगम के महत्वपूर्ण टेंडर विकास कार्यों के ऑनलाइन प्रस्ताव और नगर निगम से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण सेवाएं भी पूरी तरह ब्लॉक हो गई हैं. इतना ही नहीं, इस साइबर सेंधमारी की वजह से नगर निगम के हजारों कर्मचारियों के वेतन और भत्तों से संबंधित महत्वपूर्ण डेटा और ऑनलाइन सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिससे कर्मचारियों में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है.
40 हजार की आबादी बेहाल, गृहकर जमा करने वाले परेशान: डिजिटल युग में इस मुख्य वेबसाइट के हैक होने से नगरीय क्षेत्र की करीब 40 हजार से अधिक की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हुई है. चूंकि वर्तमान में गृहकर (हाउस टैक्स) के मूल्यांकन और जमा करने का काम जोरों पर चल रहा है, ऐसे में सैकड़ों नागरिकों ने जब गुरुवार को वेबसाइट पर जाकर अपने टैक्स की जानकारी लेनी चाही या ऑनलाइन भुगतान करना चाहा, तो वेबसाइट का लिंक ही नहीं खुला. स्क्रीन पर एरर देखकर लोग परेशान हो गए और जोनल कार्यालयों में पूछताछ के लिए भीड़ जमा होने लगी.

क्या बोले जिम्मेदार अधिकारी? इस पूरे साइबर संकट और तकनीकी खामी को लेकर जब नगर निगम के आईटी विभाग के आला अधिकारियों से बात की गई, तो उन्होंने मामले की गंभीरता को स्वीकार किया. नगर निगम आईटी विभाग के नोडल अधिकारी राहुल सबबरवाल के अनुसार,वेबसाइट के सर्वर में कुछ गंभीर दिक्कतें आई हैं और हैकिंग की आशंका को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं. एनआईसी के विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम लगातार सिस्टम की बारीकी से जांच कर रही है और इसे ठीक करने में जुटी है। हमारी कोशिश है कि जल्द से जल्द सभी ऑनलाइन सेवाओं को सुरक्षित तरीके से बहाल कर दिया जाए ताकि जनता को और अधिक परेशानी न उठानी पड़े.
सुरक्षा एजेंसियों और साइबर सेल को भी इस मामले की आंतरिक सूचना दे दी गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस साइबर हमले के पीछे किस हैकर ग्रुप का हाथ है और क्या नगर निगम का कोई संवेदनशील डेटा लीक हुआ है या नहीं.















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