आज अधिकमास का 14 वां दिन है. सुबह करीब 12 बजे तक चतुर्दशी तिथि रहने के बाद पूर्णिमा तिथि प्रारंभ होगी. लिहाजा अधिकमास की पूर्णिमा का व्रत आज 30 मई 2026, शनिवार को रखा जाएगा. वहीं स्नान-दान की पूर्णिमा कल 31 मई 2026, रविवार को मानी जाएगी. आज एक ओर शिव योग का शुभ संयोग बन रहा है, तो दूसरी तरफ भद्रा का साया भी रहेगा. वहीं शनिवार का दिन होने से शनि देव की पूजा करना शुभ फल देगा.
2026 में अधिक मास की पूर्णिमा तिथि 30 मई को सुबह 11 बजकर 57 मिनट से शुरू होकर 31 मई को दोपहर 2 बजकर 14 मिनट तक रहेगी. यानी पूर्णिमा दोनों दिन रहेगी, लेकिन यहां एक नियम काम करता है, उदय तिथि का. जो लोग पूर्णिमा का व्रत रखते हैं, वे 30 मई 2026 (शनिवार) को व्रत रखें. क्योंकि इस दिन रात में चंद्रमा पूर्ण रूप में दिखाई देगा और व्रत का संबंध चंद्र दर्शन से भी माना जाता है.
स्नान और दान कब करें? ज्येष्ठ पूर्णिमा का स्नान व दान 31 मई 2026 यानी रविवार को करें. जिसका मुहूर्त सुबह 4 बजकर 03 मिनट से लेकर सुबह 4 बजकर 43 मिनट तक रहेगा.
ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व: अधिक मास की इस पूर्णिमा का धार्मिक महत्व भी बेहद खास है. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है. साथ ही चंद्रदेव को अर्घ्य देने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है. कई घरों में इस दिन सत्यनारायण भगवान की कथा सुनने की परंपरा भी होती है, जो जीवन में सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है.
तीर्थ स्नान नहीं कर सकते तो क्या करें? अगर आप इस दिन किसी तीर्थ जैसे हरिद्वार, ऋषिकेश, वाराणसी या प्रयागराज जा सकते हैं, तो गंगा स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है. लेकिन अगर आप व्यस्तता या दूरी के कारण नहीं जा पा रहे हैं, तो घर पर भी इसका पुण्य प्राप्त किया जा सकता है. इसके लिए आप सुबह स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर ‘हर हर गंगे’ का स्मरण करते हुए स्नान करें और फिर घर के मंदिर में भगवान विष्णु-लक्ष्मी की पूजा करें.
क्या-क्या दान करें? दान का भी इस दिन विशेष महत्व बताया गया है. आप अपनी क्षमता के अनुसार चावल, दाल, आटा, गुड़, घी, दूध और मौसमी फल जैसे आम या केला दान कर सकते हैं. इसके अलावा वस्त्र दान, छाता दान और जल से भरा मिट्टी का मटका दान करना भी बहुत शुभ माना गया है. खासकर गर्मी के मौसम में यह जरूरतमंदों के लिए बहुत उपयोगी होता है.
ज्येष्ठ पूर्णिमा पूजन विधि: ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन घर के मंदिर या पूजा स्थान को साफ करें. फिर, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. दीपक जलाएं. धूप अर्पित करें. फिर, भगवान को तुलसी दल, फूल, अक्षत (चावल) अर्पित करें. चंदन का तिलक लगाएं. भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें जैसे- ऊं नमो भगवते वासुदेवाय. फिर, चंद्रदेव को शाम के समय अर्घ्य दें. अंत में आरती करें और प्रसाद वितरित करें.















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