उत्तर प्रदेश अयोध्या राम मंदिर में हाल ही में सामने आए ‘चंदा चोरी’ या चंदे में धांधली के कथित आरोपों ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है. इन आरोपों पर पहली बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुप्पी तोड़ी है और पूरे मामले पर अपना कड़ा रुख स्पष्ट किया है. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार इस मामले में पूरी पारदर्शिता चाहती है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा.
विपक्ष और सोशल मीडिया पर बीते कुछ दिनों से लगातार यह चर्चा चल रही थी कि किसी विशेष उद्देश्य के लिए इकट्ठा किए गए चंदे में बड़े पैमाने पर हेराफेरी हुई है. आरोपों का सिलसिला बढ़ता देख मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक प्रेस वार्ता में स्पष्ट कहा कि सरकार किसी भी तरह की भ्रष्टाचार या अनियमितता को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी.
मुख्यमंत्री ने चुनौती देते हुए कहा, “अगर किसी के पास भी इस चंदे में गड़बड़ी को लेकर कोई ठोस सबूत या दस्तावेज हैं, तो वे बेझिझक सामने लाएं.” उन्होंने कहा कि बिना आधार के लगाए गए आरोप केवल राजनीति से प्रेरित हो सकते हैं.
SIT करेगी मामले की पूरी जांच: मुख्यमंत्री ने इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए SIT के गठन की बात कही है. उन्होंने भरोसा दिलाते हुए कहा कि SIT इस पूरे मामले की गहनता से पड़ताल करेगी और “दूध का दूध और पानी का पानी” करेगी. इसका सीधा मतलब यह है कि जांच पूरी तरह से पारदर्शी होगी और जो भी सच है, वह जनता के सामने लाया जाएगा.
जनता के भरोसे का सवाल: योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में यह भी जोड़ा कि जनता का विश्वास और चंदे का पैसा पवित्र होता है. यदि इस पवित्रता के साथ खिलवाड़ किया गया है, तो उसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जांच प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करें ताकि किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति न रहे.
















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