चढ़ावा चोरी में मामले में SIT लेने लगी बाहर से सबूत, कल सांसद संजय सिंह को बुलाया

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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले में जांच कर एसआईटी ने बड़ा कदम उठाया। मामले एसआईटी ने सबूत सौंपने के लिए आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को समय दिया है। संजय सिंह ने सबूत सौंपने के लिए समय मांगा था। संजय सिंह ने दावा किया है कि मंदिर की जमीन खरीद में बडे पैमाने पर गड़बड़ी की गई। जमीन की मालियत से कई गुना कीमत पर खरीदी गई। इसी तरह ट्रस्ट प्रबंधन पर भी कई गंभीर आरोप लगाए हैं। संजय सिंह ने आरोपों के संबंध में साक्ष्य सौंपने के लिए समय मांगा था।

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने बुधवार को एक वीडियो संदेश जारी कर एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया है कि 25 जून को सुबह 11:00 बजे वे लखनऊ के मंडलायुक्त जो श्रीराम जन्मभूमि को मिले चंदे व दान में हुई कथित हेराफेरी की जांच कर रही एसआईटी के अध्यक्ष भी हैं, से मुलाकात करेंगे। सांसद संजय सिंह ने बताया कि उन्होंने स्वयं लखनऊ मंडलायुक्त से मुलाकात का समय मांगा था, जिसके बाद कल सुबह 11:00 बजे उन्हें उनके कार्यालय में बुलाया गया है। वीडियो में उन्होंने उन्होंने स्पष्ट किया कि अयोध्या में प्रभु श्री राम के मंदिर से संबंधित चढ़ावे की चोरी, चंदे में हुई हेराफेरी और बड़े पैमाने पर हुए ज़मीन घोटाले की जांच एसआईटी कर रही है।

प्रभु श्रीराम के नाम पर किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं: संजय सिंह के अनुसार, ज़मीन घोटाले और मंदिर से जुड़े अन्य भ्रष्टाचारों से संबंधित कई महत्वपूर्ण और पुख्ता दस्तावेज़ उनके पास मौजूद हैं। वे इन सभी कागज़ातों को कल व्यक्तिगत रूप से एसआईटी अध्यक्ष को सौंपेंगे ताकि सच सामने आ सके। उन्होंने कहा है कि वे प्रभु श्रीराम के नाम पर किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेंगे और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए हर संभव सहयोग देने को तैयार हैं।

एसआईटी ने सौंपी है प्रारंभिक रिपोर्ट आपको बता दें कि अयोध्या तीर्थ क्षेत्र में चढ़ावा प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी ने मंगलवार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट गृह विभाग को सौंप दी है। प्रारंभिक रिपोर्ट में एसआईटी ने मंदिर में चढ़ावा गिनती की प्रक्रिया के साथ ही निगरानी पर सवाल उठाए हैं। सूत्रों का कहना है कि जांच में कई कर्मचारियों के साथ बड़े अधिकारियों पर संदेश है। ऐसे में तय है कि दोषी पाए गए कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए। एसआईटी ने मामले की विस्तृत जांच के लिए अतिरिक्त समय और अधिकारियों की मांग की है।

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