हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा- प्रधानों को प्रशासक कैसे बनाया ? यूपी में पंचायत चुनाव टालना गलत

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में पंचायत चुनाव टालने पर शुक्रवार को कड़ी नाराजगी जताई है. ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की बेंच ने सुनवाई की. उन्होंने सरकार से पूछा- आपने प्रधानों को प्रशासक कैसे बनाया? यह डिविजन बेंच के आदेश का उल्लंघन है, जो अदालत की अवमानना की कैटेगरी में आता है.

हाईकोर्ट ने कहा- “प्रधानों को प्रशासक रूप में बने रहने की इजाजत नहीं दी जा सकती है. 25 और 26 मई 2026 के जिन आदेशों के आधार पर ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने का प्रयास किया गया, उन्हें पहले ही असंवैधानिक घोषित किया जा चुका है.”

अदालत ने पंचायत चुनाव टालने को असंवैधानिक बताया है. कोर्ट ने सरकार से हलफनामे के साथ OBC रिपोर्ट और पंचायत चुनाव कराने की टाइमलाइन मांगी है. हालांकि कोर्ट ने अभी किसी तरह की कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई है.

सहारनपुर के अरविंद राठौर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यदि अगली सुनवाई तक सरकार संतोषजनक जवाब नहीं देती तो संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा.

हाईकोर्ट के फैसले पर अखिलेश ने कविता के जरिए सरकार पर तंज कसा. उन्होंने लिखा- ‘भाजपा बनने चली थी सयानी, निपट गई उसकी ही कहानी. भाजपा किसी घाट की नहीं रही’.

आयोग बोला- हम चुनाव कराने के लिए तैयार: यूपी में पंचायतों का कार्यकाल 26 मई, 2026 को समाप्त हो चुका है। लेकिन, 25 मई को सरकार ने आदेश जारी कर ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त कर दिया था. साथ ही पंचायत चुनाव के लिए ओबीसी आरक्षण तय करने को पिछड़ा वर्ग आयोग भी बनाया गया. उसे छह महीने का समय दिया गया, ताकि वो हर जिले में पिछड़ों की सामाजिक आर्थिक स्थिति का आकलन कर सके.

याचिका में प्रशासकों को हटाकर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराए जाने की मांग की गई है. सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग ने अदालत को बताया कि 10 जून 2026 को मतदाता सूची प्रकाशित की जा चुकी है और आयोग चुनाव कराने के लिए तैयार है. केवल राज्य सरकार की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण चुनाव प्रक्रिया रुकी हुई है.

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