मोदी कैबिनेट ने बुधवार को बड़ा फैसला किया है. मोदी मंत्रिमंडल ने दो प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है. इसकी कुल लागत ₹14,115 करोड़ है. इन परियोजनाओं का उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और उत्तर प्रदेश में शहरी मोबिलिटी को बेहतर बनाना, यातायात जाम कम करना और कनेक्टिविटी को मजबूत करना है.
केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने दिल्ली में एनएच-148AE पर 8.1 किलोमीटर लंबी 6-लेन सुरंग और उत्तर प्रदेश में 242 किलोमीटर लंबे कानपुर-कबरई हाईवे कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दी है.
महोबा को आकांक्षी जिला घोषित किया गया: वहीं, दूसरी परियोजना के तहत उत्तर प्रदेश में कानपुर-कबरई कॉरिडोर के चार/छह लेन हाईवे निर्माण को मंजूरी दी गई है, जिसकी अनुमानित लागत ₹7,145 करोड़ है. यह 242 किलोमीटर लंबा एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे होगा, जो भोपाल-कानपुर आर्थिक कॉरिडोर का हिस्सा है. इस परियोजना को बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (टोल) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा और इसे ढाई वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. यह हाईवे कानपुर, हमीरपुर और महोबा जिलों से होकर गुजरेगा. इसमें महोबा को एक आकांक्षी जिला घोषित किया गया है.
सरकार के अनुसार, ये परियोजना बुंदेलखंड क्षेत्र में कनेक्टिविटी सुधारने, माल और यात्रियों की आवाजाही तेज करने, लॉजिस्टिक लागत घटाने और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने में मदद करेगी. साथ ही निर्माण के दौरान रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और क्षेत्रीय परिवहन ढांचा मजबूत होगा. कुल मिलाकर, ₹14,115 करोड़ के निवेश से ये दोनों परियोजनाएं राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के विस्तार, अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी और तेज गति वाले परिवहन कॉरिडोर विकसित करने की केंद्र सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं, जिससे आर्थिक विकास को गति मिलने और यात्रा समय में कमी आने की उम्मीद है.
दिल्ली को मिली बड़ी सौगात: दिल्ली परियोजना की अनुमानित लागत ₹6,970 करोड़ है. यह सुरंग द्वारका एक्सप्रेसवे (NH-248BB) के शिवमूर्ति इंटरचेंज को वसंत कुंज स्थित नेल्सन मंडेला मार्ग से जोड़ेगी. कुल मार्ग में से लगभग 3.1 किलोमीटर हिस्सा भूमिगत टनल के रूप में बनाया जाएगा, जो पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील साउदर्न रिज फॉरेस्ट के नीचे से गुजरेगा.
ये परियोजना ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के रूप में हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत विकसित की जाएगी और इसके पांच वर्षों में पूरा होने की उम्मीद है. इसके शुरू होने के बाद पश्चिमी दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली के बीच कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार होगा और राजधानी के कई व्यस्त मार्गों पर ट्रैफिक जाम कम होगा, साथ ही यह परियोजना द्वारका एक्सप्रेसवे, IGI एयरपोर्ट और दक्षिण दिल्ली के बीच यात्रा समय को भी कम करेगी.














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