देश के प्रमुख शहरों में चीनी की खुदरा कीमतों में अगस्त के अंतिम सप्ताह में कीमतों में कमी दर्ज की जाा रही है. दिल्ली से चेन्नई तक चीनी के दाम सोमवार को 2 से 4 रुपये किलो कम हुए हैं. ChiniMandi के मुताबिक दिल्ली में सोमवार को चीनी 65 रुपये किलो बिकी. वहीं, चीनी की कीमत कानपुर में 66, मुंबई में 65, रायपुर में 65, रांची में 67, गुवाहटी में 67, हैदराबाद में 67 और चेन्नई में 68 रुपये किलो रह गई.
चीनी के थोक भाव में भी गिरावट: अगर होलसेल प्राइस की बात करें तो दिल्ली में सोमवार को चीनी 6600 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर 6350 रुपये पर आ गई. कानपुर में भी दिल्ली वाले रेट पर बिक रही थी जबकि, मुंबई में 500 रुपये प्रति क्विंटल सस्ती होकर चीनी की कीमत 6250 रुपये पर आ गई.
बता दें 12 अगस्त से 22 अगस्त के बीच चीनी 14 से 17 रुपये प्रति किलो तक महंगी हो गई थी. इस दौरान गुवाहाटी में कीमत सबसे ज्यादा बढ़ी और यहां चीनी का भाव 71 रुपये किलो पहुंच गया. 24 अगस्त को दाम में सबसे अधिक गिरावट 4 रुपये की यहीं हुई.
ChiniMandi के आंकड़ों के मुताबिक, 12 अगस्त को दिल्ली में चीनी 54 रुपये किलो थी, जो 22 अगस्त को बढ़कर 68 रुपये किलो हो गई. यानी महज 10 दिनों में दिल्ली में भाव 14 रुपये किलो बढ़ गया. अब दो रुपये घटकर 65 रुपये पर आ गए हैं. इसी तरह कानपुर में कीमत 54 से बढ़कर 69 रुपये, रायपुर में 54 से 68 रुपये और मुंबई में 53 से 68 रुपये किलो हो गई. अब इन शहरों में रेट गिरने लगे हैं.
गुवाहाटी में सबसे ज्यादा तेजी और सबसे तेज गिरावट: क्षेत्रवार देखें तो गुवाहाटी में चीनी की कीमत सबसे ज्यादा बढ़ी है. यहां 12 अगस्त को भाव 54 रुपये किलो था, जो 22 अगस्त को बढ़कर 71 रुपये किलो हो गया. यानी उपभोक्ताओं को सिर्फ 10 दिनों में 17 रुपये ज्यादा चुकाने पड़े. अब राहत की बात ये है कि एक ही दिन में यहां चीनी के दाम 4 रुपये किलो गिर गए. चीनी 71 से 67 रुपये किलो पर आ गई है.
रांची और कोलकाता में भी चीनी के भाव में 16 रुपये किलो की तेजी दर्ज की गई थी. दोनों शहरों में 12 अगस्त को चीनी 54 रुपये किलो थी, जबकि 22 अगस्त को भाव 70 रुपये किलो पहुंच गया. हैदराबाद में कीमत 54 से बढ़कर 70 रुपये और चेन्नई में 55 से बढ़कर 70 रुपये किलो हो गई.
क्यों महंगी हुई चीनी: विशेषज्ञों के मुताबिक संकट केवल कम स्टॉक का नहीं, बल्कि उत्पादन के गलत अनुमान, नीतिगत फैसलों और गन्ने की बेहतर किस्मों की कमी का नतीजा है. 2025-26 सीजन में 315 लाख टन चीनी उपलब्ध होने का अनुमान था, लेकिन वास्तविक उत्पादन करीब 279 लाख टन ही रहा. उत्पादन घटने के संकेत मिलने के बावजूद सरकार ने फरवरी 2026 में निर्यात कोटा बढ़ाकर 20 लाख टन कर दिया. वास्तविक निर्यात करीब 8 लाख टन रहा. घरेलू खपत के बाद सीजन के अंत में करीब 34 लाख टन चीनी बचने का अनुमान है, जो दशकों के सबसे निचले स्तरों में है.













Leave a Reply