चीनी की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी (Raw Sugar) के ड्यूटी-फ्री आयात को मंजूरी दी है. सरकार और डीजीएफटी की ओर से 20 अगस्त 2026 को जारी आदेश के अनुसार, 10 लाख मीट्रिक टन तक कच्ची चीनी बिना आयात शुल्क के भारत लाई जा सकेगी। यह सुविधा 31 अक्टूबर 2026 तक लागू रहेगी.
सरकार के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और बढ़ते भाव पर नियंत्रण रखना है। यदि मंजूर मात्रा में पूरी 10 लाख टन कच्ची चीनी भारत आती है, तो बाजार में सप्लाई बढ़ने से कीमतों पर दबाव बनने की संभावना है.
बाजार जानकारों के मुताबिक, आयातित चीनी की पर्याप्त मात्रा में आवक होने पर चीनी के भाव में करीब 300 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक गिरावट का दबाव देखने को मिल सकता है. हालांकि, वास्तविक गिरावट कितनी होगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि मंजूर 10 लाख टन में से कितनी चीनी वास्तव में भारत आती है और घरेलू बाजार में इसकी सप्लाई कितनी तेजी से बढ़ती है.
इसके अलावा सरकार ने चीनी की स्टॉक लिमिट 200 बोरी तय कर रखी है. इसका उद्देश्य जमाखोरी पर रोक लगाना और बाजार में पर्याप्त मात्रा में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना है.
एक महत्वपूर्ण बात यह है कि ड्यूटी-फ्री आयात का अर्थ पूरी तरह टैक्स-फ्री आयात नहीं है आयात पर लागू जीएसटी का भुगतान करना होगा.
फिलहाल सरकार के इस फैसले से शॉर्ट टर्म में चीनी बाजार पर मंदी का दबाव बढ़ने की संभावना है. आने वाले दिनों में बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि 10 लाख टन में से कितनी चीनी भारत पहुंचती है और घरेलू बाजार में इसकी सप्लाई कितनी तेजी से बढ़ती है.
कुल मिलाकर, सरकार का यह फैसला चीनी की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण और घरेलू बाजार में सप्लाई मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. आने वाले दिनों में चीनी के भाव में नरमी कितनी आती है, यह आयात और घरेलू सप्लाई की रफ्तार पर निर्भर करेगा.














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