मंगला गौरी व्रत आज: भौम प्रदोष का दुर्लभ संयोग, जानें क्या हैं शुभ मुहूर्त और राहुकाल!

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आज मंगलवार यानी 25 अगस्त को सावन का अंतिम मंगला गौरी व्रत और प्रदोष व्रत रखा जा रहा है. आज मंगलवार दिन के स्वामी हनुमान जी हैं और दिन की शुरुआत मंगल ग्रह से हो रही है. आज भक्त हनुमान जी की पूजा उपासना कर जीवन के संकटों से पार पा सकते हैं. आइए 25 अगस्त 2026 के दैनिक पंचांग से जानें इस शुभ दिन पर योग, शुभ मुहूर्त और व्रत त्योहार क्या हैं, सूर्य-चंद्रमा की स्थिति क्या है और आज नक्षत्र कौन सा है.

पुरानी मान्यताओं के मुताबिक सावन माह के हर मंगलवार को मंगला गौरी व्रत किया जाता है. इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति और संतान के अच्छे भविष्य की कामना करती हैं. आइए जानते हैं इस खास मौके पर किस तरह पूजा-पाठ करना चाहिए.

व्रत कथा: पुरानी कथाओं के मुताबिक पुराने समय में धर्मपाल नाम का एक सेठ था। सेठ के पास धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी और सुंदर पत्नी भी थी पर उसका कोई संतान नहीं था. इसलिए सेठ हमेशा दुखी रहता था। काफी लंबे इंतजार के बाद भगवान की कृपा से उसकी पत्नी को एक बेटा हुआ. पुत्र के संबंध में ज्योतिषियों ने भविष्याणी की थी कि ये अल्पायु है और सोलहवें वर्ष में सांप के डसने से इसकी मृत्यु हो जाएगी.

जब सेठ का बेटा बड़ा हुआ तो उसकी शादी एक ऐसी कन्या से हो गई जिसकी मां मंगला गौरी की व्रत करती थी. इस व्रत को करने वाली महिलाओं की पुत्री को आजीवन पति का सुख मिलता है. और वह हमेशा सुखी रहता है. इस व्रत के कारण सेठ धर्मपाल के बेटे को लंबी आयु मिली.

पूजा विधि: आज सुबह जल्द उठें और व्रत करने का संकल्प लें. नहाने के बाद घर के मंदिर में भगवान के सामने कहें कि मैं पुत्र, पौत्र, सौभाग्य वृद्धि और श्री मंगला गौरी की कृपा प्राप्ति के लिए मंगला गौरी व्रत करने का संकल्प लेती हूं. इसके बाद मां मंगला गौरी यानी पार्वतीजी की मूर्ति स्थापित करें. मूर्ति को लाल कपड़े पर रखना चाहिए. इसके बाद आटे से बना दीपक घी भरकर जलाएं. पूजा, आरती करें.

ऊँ उमामहेश्वराय नम: मंत्र का जाप करें. माता को हार-फूल, लड्डू, फल, पान, इलाइची, लौंग, सुपारी, सुहाग का सामान और मिठाई चढ़ाएं. मंगला गौरी की कथा सुनें. पूजा के बाद अन्य भक्तों को प्रसाद वितरित करें और जरूरतमंद लोगों को धन-अनाज का दान करें. ध्यान रखें लगातार पांच साल तक मंगला गौरी पूजन करने के बाद पांचवें वर्ष में सावन माह के अंतिम मंगलवार को इस व्रत का उद्यापन करना चाहिए. तभी ये व्रत पूरा हो पाता है.

मंगला गौरी व्रत में माता को 16 मालाएं, आटे के लड्डू, फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची और सुहाग सामग्री अर्पित करते हैं. इस दौरान मंगला गौरी माता की कथा सुनें। मंगला गौरी पूजा में 16 की संख्या का बहुत महत्व है, इसलिए पूजा में दीपक 16 बत्तियों वाला जलाना चाहिए. वहीं माता को 16 वस्तुओं का भोग लगाना चाहिए.

शुभ मुहूर्त और काल

अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12:03 बजे से लेकर दोपहर 12:54 बजे तक
अमृत काल – दोपहर 03:48 बजे से शाम 05:33 बजे तक.
ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04:34 बजे से सुबह 05:22 बजे तक
त्रिपुष्कर योग भी बन रहा है. सुबह 06:10 बजे से लेकर सुबह 06:21 बजे तक.

अशुभ काल

दोपहर 03:38 बजे से शाम 05:12 बजे तक
यम गण्ड – सुबह 09:19 बजे से सुबह 10:54 बजे तक
कुलिक – दोपहर 12:28 बजे से दोपहर 02:03 बजे तक
दुर्मुहूर्त – सुबह 08:42 बजे से सुबह 09:32 बजे तक. दोपहर रात 11:20 बजे से रात 12:06 बजे तक.
वर्ज्यम्- सुबह 05:16 बजे से सुबह 07:02 बजे तक. सुबह 03:10 बजे से सुबह 04:54 बजे तक.

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