चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का कहर: 90 साल में आयी सबसे भीषण बाढ़, रामघाट समेत कई इलाके डूबे

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नेपाल में आई बाढ़ को लेकर अभी भूल भी नहीं पाए थे कि अब यूपी के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी ने जमकर कहर बरपाया है. नेपाल के रास्ते यूपी की नदियों में आया पानी अब लोगों के घरों में घुसने लगा है. यूपी और एमपी के कई इलाकों में पानी सड़क से काफी ऊपर बह रहा है. जिसके चलते जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया. नदी के किनारे स्थित आश्रम, मंदिर, मठ, रामघाट की दुकानें और कई होटल पानी में डूब गए हैं. बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान का अनुमान है.

शनिवार को सुबह मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ना शुरू हुआ तो करीब एक घंटे के भीतर ही रामघाट में मंदाकिनी खतरे के निशान से ऊपर निकल गई. आनन-फानन में यूपी और एमपी प्रशासन सतर्क हुआ. प्रशासन ने नदी के निचले इलाकों की तरफ रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों की तरफ जाने की चेतावनी दी. हर मोहल्ले में प्रशासन ने अनाउंसमेंट किया कि नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने की संभावना है. इसको देखते हुए सभी लोग तत्काल सुरक्षित स्थानों की तरफ पहुंचे.

MP इलाके में बारिश असर: एमपी इलाके में बारिश न थमने की वजह से मंदाकिनी का जलस्तर बहुत तेजी से बढ़ रहा है. दोपहर तक मंदाकिनी खतरे के निशान से करीब सात मीटर ऊपर पहुंच गई. अचानक आई बाढ़ से रामघाट में करीब डेढ़ सौ दुकानें पूरी तरह जलमग्न हो गईं. यहां पर तुलसी चबूतरा और आरती स्थल डूब गए हैं. टेंपो स्टैंड की तरफ से रामघाट को जाने वाले मार्ग में करीब सैकड़ों लोगों के मकानों में पानी भर गया है. निर्मोही अखाड़ा से पुरानी लंका तक मंदाकिनी का पानी मुख्य मार्ग में भर जाने से आवागमन ठप है. प्रशासन ने दोनों तरफ बैरिकेडिंग कराकर लोगों का आवागमन बंद कर दिया है. सड़कों पर नाव चल रही है.

उधर एमपी क्षेत्र में राजोला बाईपास के समीप हनुमान धारा जाने वाले मार्ग में बना पुल मंदाकिनी की बाढ़ में डूब गया. जिसकी वजह से चित्रकूट से सतना मुख्य मार्ग पर आवागमन पूरी तरह तप है.

90 साल में नहीं देखा ऐसा कहर: स्थानीय निवासी बुजुर्ग राम सलोने ने बताया कि उनकी याद में 90 साल में मंदाकिनी नदी में इससे अधिक भीषण बाढ़ कभी नहीं आई. उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर मंदाकिनी नदी के किनारे बसे कई इलाकों में घरों में पानी घुस गया है. कुछ लोगों ने अपने घरों की छतों पर शरण ले रखी है, लेकिन अब उनके मकान चारों ओर से पानी से घिर गए हैं. बाढ़ के कारण सैकड़ों लोग अपने घरों में फंसे हुए हैं. पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के प्रयास में जुटी हैं. कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट गया है.

पानी घरों में घुसा:
इधर मुख्यालय कर्बी में पुल घाट के पास बने मंदिर मंदाकिनी की बाढ़ में डूब गए हैं. तरोहा के निचले इलाके में मंदाकिनी का पानी लोगों के घरों में घुस रहा है. प्रशासनिक टीमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में डटी हुई हैं. वहीं दूसरी ओर मानिकपुर के पाठा क्षेत्र में बरदहा नदी भी उफान पर है. डोडामाफी के पास बने बांध का पानी फाटक के ऊपर से बह रहा है. बांध के टूटने का खतरा मंडराता देख लोग सुरक्षित स्थान की तरफ जाने लगे हैं. कई मार्गों में जल भराव से आवागमन बंद हो गया है. 

चित्रकूट पुलिस और प्रशासन मंदाकिनी के रौद्र रूप के चलते बांदा, सतना, कौशांबी और प्रयागराज के लोगों से सड़क मार्ग से चित्रकूट न आने की अपील कर रहा है. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वह नदी क्षेत्र के आसपास बेवजह न जाएं. 

सड़कों पर चलने लगी नाव: उत्तर प्रदेश के कटरा गूदर गांव में स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है, जबकि तरौवां ग्रामीण क्षेत्र का बड़ा हिस्सा बाढ़ के पानी में डूब गया है. कई सड़कों पर पानी भर जाने से नावों का सहारा लिया जा रहा है और लोगों को सुरक्षित निकालने का अभियान जारी है. मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने से रामघाट में बना बड़ा पुल भी पानी में डूब गया है. नदी के आसपास स्थित धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर बाढ़ का व्यापक असर पड़ा है. रामघाट के किनारे बनीं दुकानें और होटल भी जलमग्न हो गए हैं.

राहत और बचाव कार्य में जुटा पुलिस-प्रशासन: जानकीकुंड क्षेत्र में पंजाबी भगवान आश्रम, आरोग्यधाम, सद्गुरु सेवा संघ का आश्रम, जगद्गुरु रामभद्राचार्य आश्रम समेत सैकड़ों आश्रमों में बाढ़ का पानी घुस गया है. कई भवनों में पानी भरने से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ इमारतों में कंपन महसूस किया जा रहा है और उनके क्षतिग्रस्त होने की आशंका बनी हुई है. बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में लोगों के सामने सुरक्षित स्थान पर पहुंचने की चुनौती है. पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं. हालांकि स्थानीय स्तर पर और अधिक राहत एवं बचाव सहायता की आवश्यकता बताई जा रही है.

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