कानपुर में सीबीआई और क्राइम ब्रांच का अफसर बनकर बुजुर्ग डॉक्टर से 48 लाख की ठगी की गई. यह ठगी करने वालों में पांचवीं पास समेत तीन आरोपियों को साइबर क्राइम टीम ने अरेस्ट किया है. गिरफ्तार होने वाले आरोपियों में एक महिला भी शामिल है.
आरोपियों ने बुजुर्ग डॉक्टर को आतंकी गतिविधियों में शामिल होने की बात कहकर सात दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा. एडीसीपी क्राइम अरीबा नोमान ने घटना का खुलासा करते हुए बताया कि ठगी की वारदातों को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने बकायदा प्रतापगढ़ में ऑफिस खोला था.

एडीसीपी क्राइम अरीबा नोमान ने घटना का खुलासा किया.
10 सितंबर को कॉल कर किया था डिजिटल अरेस्ट: एडीसीपी क्राइम ने घटना का खुलासा करते हुए बताया कि स्वरूप नगर निवासी 73 वर्षीय योगेश चंद्र मिश्रा पेशे से डॉक्टर है. 10 सितंबर को उनके मोबाइल पर एक कॉल आई, जिसने खुद को टेलीकॉम अथॉरिटी ऑफ इंडिया का अधिकारी बताया.
उसने बताया कि उनका आधार से लिंक एक मोबाइल नंबर का इस्तेमाल मुंबई में धमकी भरी कॉल, अश्लील सामग्री और अन्य गतिविधियों में किया गया है. कॉल करने वाले ने अपना नाम रवि शर्मा बताते हुए व्हाट्सएप पर सीबीआई व इंटरपोल से संबंधित फर्जी दस्तावेज भेजे.
इसके बाद उनकी दूसरे लोगों से बातचीत करवाई गई. जिन लोगों ने खुद को क्राइम ब्रांच और सीबीआई मुंबई का अधिकारी बताते हुए उन्हें गंभीर अपराधों में संलिप्त बताया गया. साथ ही मनी लॉन्ड्रिंग का मुकदमा दर्जकर जेल भेजने की धमकी दी. आरोपियों ने जांच के नाम पर उन्हें वीडियो कॉल के जरिए 7 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा था.
बोगस फर्म के अकाउंट में ट्रांसफर किए थे 25.98 लाख: आरोपियों ने डॉक्टर के साथ 48.20 लाख की ठगी की थी. इसके बाद वह अपनी एक करोड़ की एफडी तुड़वाने के लिए बैंक पहुंचे, जहां शक होने पर बैंक अधिकारियों ने पूछताछ की तो सारा मामला खुलकर सामने आया था, पीड़ित ने साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी.
इसके बाद पुलिस जांच में जुटी तो दूसरी लेयर के ट्रांजेक्शन में बोकॉयो कांट्रेक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड फर्म के नाम से रजिस्टर्ड बैंक खाते में 25,98200 का ट्रांजेक्शन पाया गया. जांच में सामने आया कि फर्म अकाउंट नवाबगंज, गीता पार्क निवासी हाईस्कूल पास वासु व कैंट फैज साहब का हाता निवासी कंचन प्रजापति के नाम पर है.
एडीसीपी ने बताया कि वासु और कंचन ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए फर्म बनाकर प्रतापगढ़ में ऑपरेट कर रहे थे. उन्होंने बताया कि बुजुर्ग डॉक्टर को धमकाने में जिस मोबाइल नंबर का इस्तेमाल हुआ था, वो रायबरेली के वासीपरान निवासी आतिश कुमार का है. आतिश 5वीं पास है, जिसने खुद को सीबीआई अफसर बताकर डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट किया था. गिरोह का सरगना मुकुल चौबे है, जिसकी पुलिस टीमें तलाश कर रही हैं.
फर्म के खाते से 611 म्यूल अकांउट में पैसा ट्रांसफर हुआ: एडीसीपी ने बताया कि फर्म अकाउंट के खिलाफ दिल्ली, यूपी, महाराष्ट्र से चार शिकायतें एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज की गई हैं. जिनसे करीब 1.42 करोड़ रकम की ठगी की गई है. आरोपियों की बोकॉयो कांट्रेक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड फर्म से 611 म्यूल अकांउट में पैसा ट्रांसफर किया गया है. आरोपियों के पास 5 अकांउट मिले है, जो इंडियन बैंक, इंडियन ओवरसीज, यूनियन और यूको बैंक में है. यह सभी खाते बोगस फर्म के जरिए खोले गए है। जिनकी भी जांच की जा रही है.
मुकुल चौबे ने 10–10 हजार की नौकरी पर रखा था: घटना के खुलासे के दौरान एडीसीपी क्राइम ने बताया कि आरोपियों को फरवरी 2026 में 10–10 हजार रुपए की नौकरी के नाम प्रतापगढ़ भेजा था. प्रतापगढ़ के खुशी कांप्लेक्स में आरोपियों ने ऑफिस बनाया था, मार्च 2026 में आरोपियों ने फर्म रजिस्टर्ड कराई थी. मुकुल चौबे कानपुर में रहकर पूरे सिंडिकेटे को ऑपरेट करता था. उसके खिलाफ काकादेव, कर्नलगंज व उन्नाव में 5 मुकदमे दर्ज हैं. कंचन के खिलाफ उन्नाव और साइबर थाने में दो मुकदमे, जबकि आतिश और वासु के खिलाफ दो–दो मुकदमे दर्ज हैं.
















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