कानपुर में मंगलवार की सुबह 57 वर्षीय बुजुर्ग ने काली माता के स्थान पर बांके से अपना गला काटकर बलि दे दी. परिवार वालों का कहना है कि 14 सितंबर को गांव में घूम रहे एक कुत्ते ने उन्हें काट लिया था. इसके बाद से उनकी मानसिक हालत ठीक नहीं थी. सोमवार रात उनकी तबीयत अचानक खराब हुई तो उन्हें हैलट अस्पताल ले गए. यहां डॉक्टरों ने उनके बचने की गुंजाइश नहीं बताई तो उन्हें वापस घर ले आए.
मंगलवार की सुबह करीब 5 बजे वह अपनी झोपड़ी से निकले. 300 मीटर दूर काली मां के स्थान पर उन्होंने बांके से गला काटकर जान दे दी. भांजे शैलेश के मुताबिक, पिछले कई दिनों से वो काली माता के स्थान पर अपनी बलि देने की बात कह रहे थे. गांव और परिवार वाले उन्हें समझाते रहते थे.

धीरपुर गांव में काली माता के इसी स्थान पर रामआसरे ने बांके से गला काटकर जान दे दी.
कुत्ते के काटने के बाद बिगड़ी थी हालत: बिधनू क्षेत्र के तरगांव (पतारा) के मूल निवासी रामआसरे पिछले लगभग 20 साल से धीरपुर गांव में बहनोई मुन्नीलाल के खेत के पास झोपड़ी बनाकर रह रहे थे. उनकी शादी नहीं हुई थी. परिवार में भी अब कोई नहीं है.
धीरपुर गांव में उनकी बहन की ससुराल है. बहन सुखरानी के घर पर ही उनका खाना-पीना होता था. बहन-बहनोई के अलावा दो भांजे शैलेश कुमार और हिमांशु हैं.
भांजे शैलेश ने बताया कि 14 सितंबर को गांव में घूम रहे एक कुत्ते ने उनको काट लिया था. इसके बाद उन्हें सीएचसी ले जाया गया, जहां रेबीज का इंजेक्शन लगाया गया. उनके घाव का उपचार भी किया गया. इसके बाद से अक्सर वो काली माता स्थान पर जाकर बलि देने की बात कहते रहते थे.

रामआसरे की मौत से गांव में हड़कंप मच गया. उनके गले में गहरा घाव लगा है.
26 सितंबर को रेफर किया, 2 दिन बाद हैलट ले गए: 26 सितंबर को उनकी तबीयत अचानक ज्यादा खराब हो गई. उनके सीएचसी ले गए. डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत हैलट रेफर कर दिया. पुलिस के मुताबिक परिवार वाले उनको उस दिन हैलट न ले जाकर वापस घर ले आए.
इसके बाद तबीयत लगातार बिगड़ती रही तो 28 को उनको हैलट अस्पताल ले जाया गया. वहां डॉक्टरों ने बचने की गुंजाइश कम बताई तो परिवार वाले वापस घर ले आए.
सुबह झोपड़ी से निकलकर बलि दे दी: भांजे शैलेश ने बताया कि मंगलवार भोर करीब 5 बजे वह घर से निकल गए. बाद में काली मां के स्थान पर उनकी मौत की जानकारी हुई. घटना के बाद गांव में हड़कंप मच गया. सूचना पुलिस को दी गई. पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है. मामले में परिजनों के बयान और अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है.

धीरपुर गांव में बहनोई मुन्नीलाल के खेत में ट्यूबवेल के पास बनी इसी झोपड़ी में रामआसरे रहते थे.
थाना प्रभारी बोले-रैबीज फैलने से मानसिक स्थिति बिगड़ी: बिधनू थाना प्रभारी तेज बहादुर सिंह ने बताया कि ग्रामीणों और परिवार के लोगों से पूछताछ में सामने आया है कि रामआसरे का समय से इलाज नहीं कराया गया. कुत्ते के काटने के कई दिनों बाद तक उन्हें इलाज नहीं मिला. इसलिए रैबीज शरीर में फैल गया था. इससे मानसिक स्थिति बिगड़ती चली गई और उन्होंने अपनी जान दे दी.
















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