पुनीत शुक्ला, कानपुर।
कानपुर के कर्नलगंज में 42 साल पहले दो पहलवानों की रंजिश में युवक की गोली मारकर हत्या करने के मामले में फरार चल रहे हत्यारोपी को पुलिस ने 35 साल बाद चकेरी से गिरफ्तार कर लिया. वह 1990 से फरार चल रहा था उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था. वह गोंडा में नाम बदलकर रहने के साथ ही सब्जी का ठेला लगाकर जीवन यापन कर रहा था.
1984 में गोली मारकर हत्या की थी: घटना की जानकारी देते डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने सोमवार आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि दो पहलवानों की के गुटों में रंजिश में को लेकर सुल्तान नाम के युवक की वर्ष 1984 में गोंडा जनपद के खुडारे ददरा रसूलपुर खान ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. मामले में परिजनों की तहरीर पर उसके खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कराकर जेल भेज था. इसके बाद गोंडा जेल स्थानांतरित किया गया था.
वर्ष 1990 में जमानत के बाद आरोपी शौकत फरार हो गया था. आरोपी शौकत ने अपना पता चमनगंज लिखवाया था जहां वह किराए पर रहता था पुलिस के काफी खोजबीन करने के बाद भी उसका पता नहीं चला जिसके बाद 20 जनवरी 2026 को शौकत पर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने 50 हजार का इनाम घोषित किया था. डीसीपी ने बताया कि हत्यारोपियों की तलाश में दो टीमें लगी थी, आरोपी के परिजनों के चार मोबाइल नंबर जांच में आए थे.
कोयला नगर से किया गया गिरफ्तार: शौकत को कोयला नगर चकेरी से गिरफ्तार कर लिया. वह लंबे समय बाद कानपुर आया था और चकेरी निवासी अपने एक रिश्तेदार के घर जा रहा था. डीसीपी ने बताया कि आरोपी शौकत वर्तमान में करीब 70 वर्ष का है और गोंडा में पहचान छिपाकर सब्जी का ठेला लगा रहा था.
















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