रत्न शास्त्र में नीलम को सबसे शक्तिशाली और तुरंत फल देने वाला रत्न माना गया है. ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक, अगर यह रत्न किसी को सूट ना करे, तो उसे रंक से राजा बना सकता है. लेकिन अगर इसे बिना सोचे-समझे या गलत विधि से धारण किया जाए, तो यह व्यक्ति को भारी आर्थिक और मानसिक संकट में भी डाल सकता है. रत्न पहनने के दौरान अक्सर लोग जानकारी के अभाव में कुछ ऐसी चूक कर बैठते हैं, जिससे फायदे की जगह नुकसान होने लगती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि शनि के रत्न नीलम के साथ किन 3 रत्नों को धारण नहीं करना चाहिए.
रत्न पहनने से पहले जरूर लें सलाह: नीलम का सीधा संबंध शनि देव से है. शनि को न्याय और अनुशासन का देवता माना जाता है. शनि की ऊर्जा बहुत तीव्र होती है, इसलिए बिना कुंडली दिखाए या अनुभवी ज्योतिषी की सलाह के नीलम धारण करना जोखिम भरा हो सकता है. कई लोग सिर्फ दिखावे या फैशन के लिए इसे पहन लेते हैं, लेकिन अगर आपकी राशि या ग्रहों की स्थिति इसके अनुकूल नहीं है, तो यह आपके जीवन में समस्याओं का अंबार लगा सकता है.
गलत धातु या उंगली में ना पहनें नीलम: नीलम पहनने के लिए सही धातु और उंगली का होना बेहद जरूरी है. छोटी सी लापरवाही इसके सकारात्मक प्रभाव को खत्म कर सकती है. ऐसे में नीलम को हमेशा चांदी या पंचधातु में जड़वाकर ही पहनें.रत्न शास्त्र के नियमों के अनुसार, नीलम को हमेशा दाएं हाथ की बीच वाली उंगली में ही धारण करना चाहिए. इसे किसी अन्य उंगली में पहनने से इसके विपरीत परिणाम मिल सकते हैं.
इन रत्नों के साथ भूल से भी ना पहनें नीलम: हर रत्न की अपनी एक ऊर्जा और प्रकृति होती है. नीलम के साथ कुछ रत्नों का मेल आग और पानी के जैसा होता है, जो जीवन में उथल-पुथल मचा सकता है. रत्न शास्त्र के अनुसार, नीलम के साथ कभी भी माणिक्य, मोती और मूंगा धारण न करें. ऐसा इसलिए क्योंकि रत्नों की ऊर्जा का आपसी तालमेल बिगड़ने की वजह से मानसिक शांति भंग हो सकती है. साथ ही व्यापार या नौकरी में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
सही विधि से ही धारण करें नीलम: नीलम धारण करने के लिए शनिवार का दिन सबसे श्रेष्ठ माना गया है. धारण करने से पहले अंगूठी को गंगाजल और कच्चे दूध से शुद्ध करें. इसके बाद शनि देव के बीज मंत्र ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ का 108 बार जाप करें. बिना पूजा-पाठ और विधि-विधान के किसी भी दिन इसे पहन लेना शुभ नहीं माना जाता.
















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