कानपुर में पानी की समस्या भी बिजली से कम विकराल नहीं, पार्षद से सांसद तक कोई नहीं ले रहा सुध

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पुनीत शुक्ला, कानपुर।
उत्तर प्रदेश सरकार भले ही ‘हर घर जल’ योजना के तहत हर नागरिक तक पानी पहुंचाने का बड़ा दावा करती आई है लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है. भीषण गर्मी के इस मौसम में जहां पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है वहीं कानपुर के विश्व बैंक (ई-ब्लॉक) इलाके के लोग पिछले डेढ़ महीने से बूंद-बूंद पानी के लिए मोहताज हैं. अधिकारियों की लापरवाही से आक्रोशित क्षेत्रीय जनता ने आज मोहल्ले में बनी पानी की टंकी पर चढ़कर हाथों में खाली बाल्टी लेकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया.

डेढ़ महीने से ठप है सप्लाई, दूर-दराज से पानी लाने को मजबूर विश्व बैंक ई-ब्लॉक के निवासियों का जीवन इन दिनों बेहद नारकीय हो चुका है स्थानीय लोगों के मुताबिक पिछले डेढ़ महीने से उनके घरों के नलों में पानी की एक बूंद तक नहीं टपकी है लोग भीषण गर्मी में मीलों दूर से या टैंकरों के सहारे पानी लाकर जैसे-तैसे अपना जीवन यापन करने को मजबूर हैं.

क्षेत्रीय नागरिकों का आरोप है कि इस गंभीर किल्लत को लेकर कई बार स्थानीय पार्षद से लेकर जलकल विभाग के उच्च अधिकारियों तक गुहार लगाई गई क्षेत्र की मोटर खराब पड़ी है लेकिन बार-बार शिकायत के बाद भी कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या जनप्रतिनिधि मौके पर आकर इस समस्या को हल करने का साहस नहीं जुटा पा रहा है.

इसी उदासीनता से तंग आकर आज जनता का गुस्सा फूट पड़ा सरकार एक तरफ हर घर जल पहुंचाने का दावा करती है लेकिन हमारे ई-ब्लॉक की जनता पानी की बूंद-बूंद से ग्रसित है डेढ़ महीने से लोग त्राहि-त्राहि कर रहे हैं आज हमने प्रदर्शन के माध्यम से सोई हुई सरकार और लापरवाह अधिकारियों को जगाने का काम किया है.

लोग बोले- डेढ़ महीने से सप्लाई ठप है: स्थानीय लोगों ने बताया कि डेढ़ महीने से पानी की सप्लाई ठप है। उनके घरों के नलों में पानी की एक बूंद तक नहीं टपकी है. लोग भीषण गर्मी में मीलों दूर से या टैंकरों के सहारे पानी लाकर जैसे-तैसे अपना जीवन यापन करने को मजबूर हैं. क्षेत्रीय नागरिकों का आरोप है कि इस गंभीर किल्लत को लेकर कई बार स्थानीय पार्षद से लेकर जलकल विभाग के उच्च अधिकारियों तक गुहार लगाई गई क्षेत्र की मोटर खराब पड़ी है.

नगर निगम हो गया फेल: शीलू दुबे ने बताया कि पानी की टंकी डेढ़ महीने से खराब पड़ी है. सभी अधिकारी व नेताओं से कहा गया है, लेकिन किसी को सुध नहीं आ रही है. लोग पानी खरीदने को मजबूर हैं। नगर निगम फेल हैं. क्षेत्र के हजारों लोग परेशान हैं लेकिन सुनने वाला कोई नहीं है। जनता त्रस्त और नेता मस्त हैं.

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