इरशाद खान, हमीरपुर।
हमीरपुर में बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल के ध्वस्त होने के बाद रविवार को कांग्रेस पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल हमीरपुर पहुंचा, जिसमें कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के सदस्य एवं भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रभारी मनीष शर्मा तथा प्रदेश युवा कांग्रेस के महासचिव मोंटी शुक्ला शामिल रहे.
प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर हादसे की उच्चस्तरीय जांच और मृतक मजदूरों के परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग की। इसके बाद पांच सदस्यीय दल घटनास्थल के लिए रवाना हो गया.

जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपने के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में उस समय हल्की नोकझोंक की स्थिति बन गई जब पुलिस ने प्रदेश युवा कांग्रेस के महासचिव मोंटी शुक्ला को अंदर जाने से रोक दिया. इस दौरान उनकी सीओ सदर से बहस भी हुई. बाद में प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा.
हमीरपुर पहुंचने पर कांग्रेस नेता मनीष शर्मा ने केंद्र और प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में इस समय विकास के दो मॉडल चल रहे हैं. एक मॉडल बड़े उद्योगपतियों और कंपनियों के हितों को केंद्र में रखता है, जबकि दूसरा आम जनता, मजदूरों और कमजोर वर्गों का है. उन्होंने आरोप लगाया कि हमीरपुर में छह मजदूरों की मौत कोई साधारण दुर्घटना नहीं बल्कि “संस्थागत हत्या” है, जिसके लिए सरकार, निजी कंपनी और जिम्मेदार अधिकारी जवाबदेह हैं.
मनीष शर्मा ने कहा कि मृतक मजदूरों के परिजनों को कुल मिलाकर 12 लाख रुपये का मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि किसी व्यक्ति के जीवन की कीमत इससे कहीं अधिक है. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार स्वयं राहत देने के बजाय केवल बीमा के माध्यम से भुगतान कर रही है तो वह अपनी सामाजिक जिम्मेदारी से पीछे हट रही है. उनका कहना था कि ऐसे हादसों के बाद प्रभावित परिवारों का सरकार और व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होता है.














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