हमीरपुर में शनिवार सुबह करीब 10 बजे रेहड़ी-पटरी दुकानदार अपनी रोज़ी-रोटी बचाने की गुहार लेकर जिलाधिकारी आवास पहुंचे. दुकानदारों का कहना था कि उन्हें नगर पालिका द्वारा सड़क किनारे और नाले पर बनी उनकी दुकानें हटाने के निर्देश दिए गए हैं. हालांकि उनका आरोप है कि जिलाधिकारी से मुलाकात नहीं हो सकी और उनकी फरियाद सुने बिना ही उन्हें वापस लौटा दिया गया.
ये सभी दुकानदार किंग रोड और बस स्टैंड के आसपास वर्षों से छोटी-छोटी दुकानें लगाकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं. नगर पालिका की कार्रवाई की आशंका से चिंतित दुकानदारों ने प्रशासन से उन्हें न उजाड़ने और वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना कार्रवाई न करने की मांग की.

दुकानदार रामदयाल ने बताया कि उसकी दुकान बस स्टैंड के पास नाले पर है और उसी से पूरे परिवार का गुज़ारा चलता है. उन्होंने कहा कि रोज़ कमाने पर ही घर में चूल्हा जलता है. यदि दुकान हट गई तो परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होगी. उनका कहना है कि उनकी दुकान से आवागमन में कोई बाधा नहीं होती, इसलिए उन्हें हटाया न जाए.
वहीं महेश ने बताया कि उसकी दुकान बस स्टैंड के सामने सीमित दायरे में नाले पर है. उन्होंने कहा कि छोटे से शहर में ऐसी कोई दूसरी जगह नहीं है जहां वह दुकान लगाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें. ऐसे में प्रशासन उन्हें उजाड़ने के बजाय कोई समाधान निकाले. दुकानदारों द्वारा जिलाधिकारी को सौंपे जाने के लिए तैयार किए गए ज्ञापन पर 37 प्रभावित रेहड़ी-पटरी दुकानदारों के हस्ताक्षर हैं. इन सभी को नाले पर बनी जगह खाली करने और अपनी दुकानें हटाने के निर्देश दिए गए हैं. दुकानदारों ने प्रशासन से मानवीय आधार पर उनकी आजीविका की रक्षा करने की मांग की है.
















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