लखनऊ अग्निकांड के बाद सुरक्षा मानकों में लापरवाही बरतने वाले 18 अफसरों पर गिरी गाज

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लखनऊ अग्निकांड को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक विशेष समीक्षा बैठक की. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह घटना राज्य के लिए एक बड़ा सबक है और अब अग्निशमन मानकों के साथ किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा. इस मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई की संस्तुति की है. एलडीए (लखनऊ विकास प्राधिकरण) के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार की जांच रिपोर्ट के आधार पर कुल 18 अधिकारियों को जिम्मेदार माना गया है.

बेसमेंट में अनुमति कतई ना दी जाए: बैठक में इमारतों के गलत उपयोग पर गहरी चिंता जताई गई. मुख्यमंत्री ने कड़े निर्देश दिए हैं कि जिस इमारत को जिस काम के लिए अनुमति मिली है, उसका उपयोग उसी काम के लिए होना चाहिए. विशेष रूप से यह स्पष्ट किया गया कि बेसमेंट में कोचिंग सेंटर, नर्सिंग होम या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चलाने की अनुमति कतई नहीं दी जाएगी. साथ ही, आपातकालीन सेवाओं के रिस्पॉन्स टाइम को और बेहतर बनाने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा गया है, ताकि आग लगने की स्थिति में मदद तत्काल पहुंच सके.

सुरक्षा मानकों के लिए चलाया जाए विशेष अभियान: मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के हर जिले में विशेष टीमें गठित की जाएं. ये टीमें सभी व्यावसायिक और रिहायशी इमारतों का व्यापक ‘फायर सेफ्टी ऑडिट’ करेंगी. मुख्यमंत्री ने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए कि ‘पहले जागरूकता, फिर कार्रवाई’ के सिद्धांत का पालन किया जाए. इस अभियान के दौरान किसी भी आम नागरिक को बेवजह परेशान न किया जाए.

कार्रवाई की जद में आए प्रमुख अधिकारी

विहित प्राधिकारी: तत्कालीन विहित प्राधिकारी दुर्गेश श्रीवास्तव.
जोनल अधिकारी: अधिशासी अभियंता अवनीन्द्र सिंह, बी.पी. मौर्या, पी.सी. पांडेय और आनंद मिश्रा.
तकनीकी टीम: सहायक अभियंता (सुनील कुमार, गिरीश चंद्र शर्मा, अमर कुमार मिश्रा, आर.एस. सिंह, अनिल कुमार, संजय शुक्ला) और अवर अभियंता (जय प्रकाश नारायण, रवींद्र कुमार श्रीवास्तव, ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव, प्रमोद पाण्डेय, अम्बरीश कुमार शर्मा, शिवानंद शुक्ला एवं हेमंत कुमार).

यह कार्रवाई प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति को दर्शाती है. मुख्यमंत्री के इन कड़े फैसलों से उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रुकेगी और प्रदेश की इमारतों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन होगा.

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