अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक के बाद बड़ी खबर सामने आई है. सूत्रों के मुताबिक ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है. लंबे समय से दोनों को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं चल रही थीं. अब बैठक में लिए गए इस फैसले को ट्रस्ट के भीतर बड़े बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है. हालांकि ट्रस्ट की ओर से इस पूरे मामले पर आधिकारिक बयान का इंतजार है. लेकिन सूत्रों का कहना है कि इस्तीफों को लेकर गंभीर चर्चा हुई और आखिरकार उन्हें मंजूरी दे दी गई.
बैठक में संतों ने जताई नाराजगी: सूत्रों के अनुसार इस बैठक का माहौल काफी तनावपूर्ण रहा. कई संतों और ट्रस्ट सदस्यों ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की. बताया जा रहा है कि चढ़ावे से जुड़े कथित विवाद और रामधन के कथित गबन जैसे मुद्दों को लेकर कई सदस्यों ने सवाल उठाए. बैठक के दौरान कुछ संतों ने साफ शब्दों में कहा कि मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए. उनका मानना था कि श्रद्धालुओं के विश्वास को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने दिया जा सकता.
चढ़ावा और वित्तीय मामलों को लेकर उठे सवाल: सूत्र बताते हैं कि बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा चढ़ावे के प्रबंधन और आर्थिक मामलों को लेकर हुई. संतों का कहना था कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मंदिर में हर वित्तीय प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह होनी चाहिए. इसी मुद्दे पर कई सदस्यों ने अपनी नाराजगी जाहिर की. हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन बैठक में इन विषयों पर गंभीर चर्चा होने की बात सामने आई है.
स्वामी परमानंद गिरी का गुस्सा भी चर्चा में रहा: बैठक में स्वामी परमानंद गिरी महाराज का गुस्सा भी चर्चा का विषय बना रहा. सूत्रों के मुताबिक वह बैठक के दौरान काफी नाराज दिखाई दिए और उन्होंने अपनी असहमति खुलकर जताई. बताया जा रहा है कि अन्य कई संतों ने भी उनकी बातों का समर्थन करते हुए ट्रस्ट के कामकाज पर सवाल उठाए. बैठक में मौजूद लोगों का कहना है कि संतों का असंतोष पहली बार इतनी स्पष्टता के साथ सामने आया है.
बिना बुलाए पहुंचे गोपाल राव: बैठक के दौरान एक और घटनाक्रम ने सबका ध्यान खींचा. सूत्रों के मुताबिक गोपाल राव बिना औपचारिक बुलावे के बैठक स्थल पर पहुंच गए थे. लेकिन उन्हें बैठक कक्ष में प्रवेश नहीं दिया गया और बाहर से ही वापस लौटना पड़ा. इस घटनाक्रम के बाद ट्रस्ट के भीतर चल रही गतिविधियों और बैठकों की प्रक्रिया को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं.
क्या ट्रस्ट में शुरू होने वाला है बदलाव का नया दौर? चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को केवल दो पदाधिकारियों के हटने के रूप में नहीं देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि यह फैसला ट्रस्ट के संगठनात्मक ढांचे और कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव की शुरुआत हो सकता है. पिछले कुछ समय से ट्रस्ट के कामकाज को लेकर अलग-अलग तरह के सवाल उठते रहे हैं. ऐसे में अब आगे नए पदाधिकारियों की नियुक्ति, जिम्मेदारियों का बंटवारा और प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव पर सभी की नजर रहेगी.
















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