दशावतार व्रत आज: 4 महादशमी में से है एक, पुरुषों और महिलाओं को अलग-अलग मिलता है फल

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भाद्रपद शुक्‍ल दशमी तिथि के दिन दशावतार व्रत रखा जाता है. यह साधारण व्रत नहीं है, बल्कि भगवान विष्‍णु के 10 अवतारों को समर्पित व्रत है. आज 21 सितंबर दिन सोमवार को यह व्रत रखा जाएगा. आइये जानते हैं इसका महत्‍व, फल और पूजा विधि-

भगवान विष्‍णु को समर्पित कई व्रत रखे जाते हैं, जिसमें सभी एकादशी, अनंत चतुर्दशी, गुरुवार व्रत आदि शामिल हैं. इसके अलावा भगवान विष्‍णु के अवतारों को समर्पित भी व्रत हैं – जैसे जन्‍माष्‍टमी, कल्कि जयंती आदि. लेकिन दशावतार व्रत ऐसा है जो भगवान विष्‍णु के सभी 10 अवतारों को समर्पित है. दशावतार व्रत भाद्रपद शुक्‍ल दशमी को रखा जाता है, जो कि इस साल 21 सितंबर 2026, सोमवार को है. धार्मिक मान्‍यता है कि सारे पापों से मुक्ति पाकर मोक्ष की ओर ले जाने वाला यह व्रत बहुत खास है.

दशावतार व्रत पूजा मुहूर्त : प्रोकेरला पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्‍ल दशमी तिथि की शुरुआत 20 सितंबर 2026 को शाम 05:51 बजे से 21 सितंबर 2026 की रात 08:01 बजे तक है. 21 सितंबर को पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:43 बजे से 05:31 बजे तक है. वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:55 बजे से दोपहर 12:44 बजे तक है.

दशावतार व्रत का महत्व: भविष्य पुराण समेत कई धर्मग्रंथों में दशावतार व्रत का महत्‍व बताया गया है. इसके अनुसार जो साधक 10 साल तक दशावतार व्रत नियमपूर्वक करे, पूजा करे और फिर इसका उद्यापन करे तो उसे बहुत शुभ मिलता है.

इन ग्रंथों में किए गए वर्णन के अनुसार, पुरुष यदि इस विधि से 10 साल व्रत करे तो उसको दसों दिशाओं में मान-सम्‍मान मिलता है. धन-सुख मिलता है. साथ ही मरने के बाद विष्‍णुलोक का मार्ग खुलता है.

वहीं महिला यदि विधिपूर्वक यह व्रत करे तो उसे धन-धान्‍य से भरा घर, सुखी परिवार, आज्ञाकारी संतान मिलती है. वहीं मरने के बाद विष्‍णुलोक में स्‍थान मिलता है.

दशावतार पूजा विधि: दशावतार व्रत की सुबह पवित्र नदी में स्‍नान करें या घर पर ही पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाकर स्‍नान कराएं. फिर व्रत-पूजा का संकल्‍प लें. पूजास्‍थल साफ करके चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान के 10 अवतारों की फोटो या मूर्ति स्‍थापित करें और हल्‍दी, अक्षत, फल, फूल अर्पित करें. दीपक जलाएं.

इस व्रत में भगवान विष्‍णु का मालपुआ, घेवर, शकरपारे, सुहाल, आटे-घी और शक्‍कर से बना भोग लगाने का विधान है. साथ ही इस व्रत में प्रसाद का एक हिस्‍सा योग्‍य ब्राह्मण को दान करें. फिर स्‍वयं ग्रहण करें. साथ ही इस दिन गाय, अन्‍न, वस्‍त्र का दान करना बहुत फलदायी होता है.

साल की 4 दशमी तिथि बेहद खास: सनातन धर्म में साल में 4 ऐसी दशमी तिथि ऐसी आती हैं, जो बेहद खास हैं.

1-गंगा दशहरा – ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को मनाया जाने वाला पर्व धरती पर गंगा के अवतरण का दिन है.
2-आशा दशमी – आषाढ़ शुक्ल दशमी का यह व्रत मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला व्रत है. इस व्रत में देवी पार्वती और दसों दिशाओं की देवियों की पूजा की जाती है.
3-दशावतार व्रत – भाद्रपद शुक्ल दशमी का यह व्रत भगवान विष्‍णु के 10 अवतारों को समर्पित है.
4-विजया दशमी/दशहरा – आश्विन शुक्ल दशमी को प्रभु राम ने रावण का वध करके लंका पर विजय पाई थी. यह दिन बुराई पर अच्‍छाई की जीत का दिन है.

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