दूर्वा गणपति व्रत आज: बन रहा सर्वार्थ सिद्धि और साध्‍य योग का संयोग, जानें पूजा विधि व मुहूर्त

Spread the love

आज सावन शुक्‍ल चतुर्थी है जिसे दूर्वा गणेश चतुर्थी कहते हैं. इस शुभ मौके पर पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है. वहीं भद्रा काल भी रहेगा. दूर्वा गणेश चतुर्थी गणपति बप्‍पा को समर्पित व्रत है, जिसमें उन्‍हें दूर्वा की 11 या 21 गांठें अर्पित करना बेहद शुभ और मनोकामना पूर्ति करने वाला माना जाता है. इस साल यह व्रत बेहद खास है क्‍योंकि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और साध्‍य योग का संयोग बन रहा है. वहीं साध्‍य योग भी बन रहा है.

आज गणेशजी को दूर्वा (विशेष तरह की हरी घास) चढ़ाकर विशेष पूजा की जाती है. ऐसा करने से परिवार में समृद्धि बढ़ती है और मनोकामना भी पूरी होती है. इस व्रत का जिक्र स्कंद, शिव और गणेश पुराण में किया गया है.

आज के शुभ काल

ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04:31 बजे से 05:19 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:05 बजे से 12:56 बजे तक
अमृत काल – रात 09:43 बजे से देर रात 11:21 बजे तक

आज के अशुभ काल

राहुकाल – शाम 05:19 बजे से 06:54 बजे तक
यम गण्ड – दोपहर 12:31 बजे से 02:07 बजे तक
कुलिक – दोपहर 03:43 बजे से शाम 05:19 बजे तक
दुर्मुहूर्त – शाम 05:12 बजे से 06:03 बजे तक
वर्ज्यम् – सुबह 11:58 बजे से दोपहर 01:36 बजे तक

करण

विष्टि – सुबह 05:05 बजे से शाम 04:53 बजे तक
बव – शाम 04:53 बजे से 17 अगस्‍त की 04:51 बजे तक

गणेशजी को दूर्वा चढ़ाने की विधि: जीवन में सुख व समृद्धि की प्राप्ति के लिए श्रीगणेश को दूर्वा ज़रुर अर्पित की जानी चाहिए. दूर्वा एक खास तरह की घास है. जिसे किसी भी बगीचे में आसानी से उगाया जा सकता है। भगवान श्रीगणेश को चढ़ने वाली इस पवित्र घास को इकट्‌ठा कर के गांठ बनाकर गुड़ के साथ चढ़ाया जाना चाहिए. भगवान गणपति को हमेशा दूर्वा का जोड़ा ही चढ़ाया जाता है. इनमें 11 जोड़ा दूर्वा भगवान गणेश को चढ़ाने से कामकाज में आने वाली रुकावटें दूर होती हैं और मनोकामना की पूरी होती है.

दूर्वा गणपति व्रत की पूजा विधि: सुबह जल्दी उठकर नहाने के बाद गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर के सामने बैठकर व्रत और पूजा का संकल्प लेना चाहिए. इसके बाद अपनी इच्छा अनुसार सोने, चांदी, तांबे, पीतल या मिट्टी से बनी भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित करें. फिर ऊं गं गणपतयै नम: मंत्र बोलते हुए जितनी पूजा सामग्री उपलब्ध हो उनसे भगवान श्रीगणेश की पूजा करें. गणेशजी की मूर्ति पर सिंदूर लगाएं. फिर 21 दूर्वा दल चढ़ाएं. गुड़ या बूंदी के 21 लड्डुओं का भोग भी लगाएं. इसके बाद आरती करें और फिर प्रसाद बांट दें.

गणपति को दूर्वा चढ़ाने का कारण: पौराणिक कथा के मुताबिक अनलासुर नाम के दैत्य से स्वर्ग और धरती पर त्राही-त्राही मची हुई थी. अनलासुर ऋषियों और आम लोगों को जिंदा निगल जाता था. दैत्य से परेशान होकर देवी-देवता और ऋषि-मुनि महादेव से प्रार्थना करने पहुंचे. शिवजी ने कहा कि अनलासुर को सिर्फ गणेश ही मार सकते हैं. फिर सभी ने गणेशजी से प्रार्थना की।

श्रीगणेश ने अनलासुर को निगला तो उनके पेट में जलन होने लगी. कई उपाय के बाद भी जलन शांत नहीं हो रही थी. तब कश्यप ऋषि ने दूर्वा की 21 गांठ बनाकर श्रीगणेश को दी. जब गणेशजी ने दूर्वा खाई तो उनके पेट की जलन शांत हो गई. तभी से श्रीगणेश को दूर्वा चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *