परिवर्तिनी एकादशी आज: श्रीहरि लेते हैं 4 माह की निद्रा में करवट, जानें मुहूर्त व उपासना विधि

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आज 22 सितंबर मंगलवार को परिवर्तिनी एकादशी है. भगवान विष्‍णु के करवट लेने की इस विशेष तिथि पर शास्‍त्रों में बताए कुछ नियमों का पालन करने की मान्‍यता है. साथ ही पूजा के दौरान यह व्रत कथा जरूर पढ़ें.

भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है. इसे पद्मा एकादशी और जयंती एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. अगर कहीं पद्मा एकादशी या जयंती एकादशी लिखा मिले, तो वह परिवर्तिनी एकादशी के लिए ही इस्तेमाल किया गया नाम है.

4 महीने के लिए पाताल लोक में योगनिद्रा में लीन भगवान विष्‍णु आज परिवर्तिनी एकादशी के दिन करवट लेते हैं. इस एकादशी को डोल ग्‍यारस, जलझूलनी एकादशी, पद्यमा एकादशी और पार्श्‍व एकादशी भी कहते हैं. देश में अलग-अलग जगहों पर इस एकादशी को मनाने का तरीका अलग-अलग है. कई स्‍थानों पर डोल ग्‍यारस का जुलूस निकाला जाता है तो कुछ जगहों पर इस दिन भगवान विष्‍णु को जल विहार कराया जाता है, इसलिए जलझूलनी एकादशी भी कहते हैं. जानिए शास्‍त्रों के अनुसार इस दिन किन नियमों का पालन करना चाहिए.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा-उपासना करने से जाने-अनजाने किए गए पापों का नाश होता है. इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को इस लोक में सुख-समृद्धि और भौतिक जीवन में उन्नति मिलती है, जबकि परलोक में मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है.

शुभ मुहूर्त: परिवर्तिनी एकादशी की तिथि 21 सितंबर यानी कल रात 8 बजे शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन 22 सितंबर यानी आज रात 9 बजकर 43 मिनट पर होगा. 

परिवर्तिनी एकादशी का पारण 23 सितंबर की सुबह 6 बजकर 10 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 35 मिनट तक होगा. 

इस दिन होती है भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा: परिवर्तिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. भगवान विष्णु का वामन अवतार उनके प्रमुख अवतारों में से एक है. इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और उनसे सुख, शांति व समृद्धि की कामना करते हैं.

एकादशी के नियम

➤एकादशी के दिन बाल धोने और नाखून-बाल काटने से बचना चाहिए. यदि बाल धोना ही पड़े तो सिर्फ पानी से धोएं या बालों में थोड़ा कच्‍चा दूध लगाएं.
➤एकादशी के दिन घर में पोछा लगाना, कपड़ा धोना भी वर्जित है.
➤एकादशी व्रत में समा के चावल भी न खाएं क्‍योंकि इस दिन किसी भी तरह का चावल खाना वर्जित है.
➤एकादशी व्रत न करें तो इस दिन तामसिक भोजन न करें.

गणेश उत्सव के बीच पड़ती है परिवर्तिनी एकादशी: खास बात यह है कि परिवर्तिनी एकादशी का समय गणेश उत्सव के दौरान आता है. ऐसे में इस दिन भगवान विष्णु के साथ भगवान गणेश की पूजा करना भी शुभ माना जाता है. मान्यता है कि दोनों देवताओं की आराधना करने से भक्त को सुख-समृद्धि और उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति को संतान सुख, धन-समृद्धि या जीवन में उन्नति की कामना है, तो परिवर्तिनी एकादशी का व्रत उसके लिए लाभकारी माना जाता है. इस दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु और भगवान गणेश की पूजा करने से पापों का क्षय होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आने की कामना की जाती है.

पापों के नाश और मोक्ष के लिए महत्वपूर्ण माना गया है व्रत: इसलिए परिवर्तिनी एकादशी को पापों के नाश, संतान सुख, विद्या-बुद्धि और धन-समृद्धि की कामना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ व्रत-पूजा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है. उम्मीद है कि 6 सितंबर को हम सभी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ परिवर्तिनी एकादशी का पालन जरूर करेंगे.

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