मौनी अमावस्या पर होगा दूसरा अमृत स्नान, जानें शुभ मुहूर्त; जरूर करें ये 3 काम

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माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है. इस अमावस्या का सनातन धर्म में विशेष धार्मिक महत्व है. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस इस साल मौनी अमावस्या पर अमृत स्नान का भी अद्भुत संयोग बन रहा है. मान्यता है कि इस दिन किए गए गंगा स्नान, दान और पितरों के निमित्त किए गए उपाय का महत्व कई गुना अधिक बढ़ जाता है. ऐसे में चलिए जानते हैं कि इस साल मौनी अमावस्या के दिन किन तीन कार्यों को करने से पितरों की विशेष कृपा प्राप्त होगी.

कब है मौनी अमावस्या?

हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि की शुरुआत 28 जनवरी को रात 7 बजकर 35 पर होगी और इसका समापन 29 जनवरी को शाम 6 बजकर 05 पर होगा. उदया तिथि की मान्यता के अनुसार, इस साल मौनी अमावस्या का अमृत स्नान बुधवार 29 जनवरी 2025 को होगा.

संगम स्नान और सूर्य को अर्घ्य दें

यदि आप महाकुंभ में डुबकी लगाने जा रहे हैं, तो स्नान के दौरान पितरों का स्मरण करते हुए सूर्य को जल का अर्घ्य जरूर दें. साथ ही “ॐ पितृ देवतायै नमः” मंत्र का कम से कम 11 बार जाप करें. यह उपाय पितरों को प्रसन्न करता है और आपके जीवन में सुख-समृद्धि लाता है.

अन्न, वस्त्र और दान का महत्व

मौनी अमावस्या के दिन अन्न, वस्त्र या अन्य जरूरतमंद वस्तुओं का दान करना चाहिए. इसके अलावा, पशु-पक्षियों को दाना डालना भी शुभ माना गया है. यह उपाय पितरों की आत्मा को तृप्त करता है और पितृ दोष से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है.

पितृ स्तोत्र और दीपदान

इस दिन पितरों के निमित्त दीपक जलाना और पितृ कवच, पितृ सूक्तम या पितृ स्तोत्र का पाठ करना लाभकारी होता है. ऐसा करने से पितरों की अतृप्त आत्मा तृप्त होती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है. इसके परिणामस्वरूप आपके पारिवारिक जीवन में सुख और समृद्धि आती है.

घर पर करें आसान उपाय

यदि आप महाकुंभ में शामिल नहीं हो सकते, तो घर पर भी श्रद्धापूर्वक इन उपायों को कर सकते हैं. घर की दक्षिण दिशा में चौमुखी दीपक जलाएं. यह साधारण उपाय भी पितरों की कृपा पाने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है.

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