कब है ज्येष्ठ पूर्णिमा? जानें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि, इन स्थानों पर जरूर जलायें दीपक

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सनातन धर्म में पूर्णिमा के दिन स्नान और दान-धर्म करने की परंपरा है. आज ज्येष्ठ पूर्णिमा मनाई जा रही है. ज्येष्ठ माह में पड़ने वाली इस पूर्णिमा का खास महत्व है. मान्यता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इस दिन व्रत और दान से पितरों का आशीर्वाद मिलता है. इस दिन से विशेष रूप से भगवान शंकर और विष्णु की पूजा की जाती है. साथ ही, इस दिन वट सावित्री पूर्णिमा का भी व्रत रखा जाता है. 

ज्‍येष्‍ठ मास की पूर्णिमा पर स्‍नान-दान, पूजा-अर्चना के साथ कुछ खास जगहों पर दीपक जरूर जलाएं. ऐसा करने घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है और खूब धन-समृद्धि, यश मिलता है.

ज्येष्ठ पूर्णिमा शुभ मुहूर्त

ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 10 जून यानी कल सुबह 8 बजकर 05 मिनट पर होगी और तिथि का समापन 11 जून को सुबह 9 बजकर 43 मिनट पर होगा. इस दिन पूर्णिमा का चांद रात 10 बजकर 50 मिनट पर निकलेगा. उदयातिथि के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा 11 जून को ही मनाई जाएगी. 

स्नान दान का मुहूर्त- ज्येष्ठ पूर्णिमा पर सुबह 4 बजकर 02 मिनट से लेकर 4 बजकर 42 मिनट तक स्नान और दान किया जाएगा. 

ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत पूजन विधि

ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन स्नान, ध्यान और पुण्य कर्म का विशेष महत्व है. आज के दिन व्रत और पूजा-पाठ से विवाह में आ रही दिक्कतें भी दूर होती हैं. आज के दिन श्वेत वस्त्र धारण कर भोलेनाथ की पूजा करनी चाहिए. इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा करना भी शुभ माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि पीपल के पेड़ पर भगवान विष्णु संग मां लक्ष्मी वास करती हैं. इस दिन चंद्रमा की पूजा का भी विधान है. चंद्र देव को दूध से अर्घ्य देने से जीवन में आ रही हर समस्या दूर हो जाती है.

ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा पर यहां-यहां जलाएं दीपक

पूर्णिमा का दिन मां लक्ष्‍मी को प्रसन्‍न करने का भी दिन होता है. यदि आप सुख-सौभाग्‍य के साथ धन-समृद्धि भी चाहते हैं तो ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा के दिन इन जगहों पर दीपक जरूर जलाएं. इससे नकारात्‍मकता दूर होगी और खुशियों का आगमन होगा.

नदी में दीपदान – पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्‍नान करने के बाद दीपदान जरूर करें. साथ ही सूर्य देव को अर्घ्य दें. ऐसा करने से मन की नकारात्मकता दूर होती है और पितृ दोष दूर होता है. पूर्वज प्रसन्‍न होकर आशीर्वाद देते हैं.

तुलसी कोट – पूर्णिमा की सुबह स्‍नान करने के बाद तुलसी के पौधे में जल चढ़ाएं और घी का दीपक जलाकर आरती करें. इससे मां लक्ष्‍मी प्रसन्‍न होती हैं और धन की तिजोरी भरी रहती है.

घर का मुख्‍य द्वार – पूर्णिमा की रात घर के मुख्‍य द्वार पर दीपक जलाएं. इससे आपके घर में मां लक्ष्‍मी का आगमन होगा और आर्थिक तंगी हमेशा दूर रहेगी.

ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व

पूर्णिमा तिथि पूर्णत्व की तिथि मानी जाती है, इस तिथि को चंद्रमा सम्पूर्ण होता है. हिन्दू धर्म में ज्येष्ठ पूर्णिमा का विशेष महत्व है. हिन्दू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह हिंदू वर्ष का तीसरा महीना है. ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन स्नान-दान का विशेष लाभ मिलता है. इस दिन किए गए दान और उपवास से अक्षय पुण्य फल मिलता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की पूजा करने से चंद्र दोष से मुक्ति मिलती है.

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