शिवलिंग पर भूलकर भी न चढ़ाएं ये 5 चीजें, फायदे की जगह हो सकता है नुकसान

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महाशिवरात्रि सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि महादेव और माता पार्वती के अद्भुत मिलन का महापर्व है. हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में 15 फरवरी को आने वाली यह शिवरात्रि भक्तों के लिए विशेष फलदायी है. वैदिक ज्योतिष शास्त्र की गणना के अनुसार, इस साल महाशिवरात्रि पर कई दुर्लभ और शक्तिशाली योग भी बन रहे हैं. इसलिए इस साल की महाशिवरात्रि अत्यंत खास मानी जा रही है. महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को भक्त उनकी विशेष कृपा पाने के लिए शिवलिंग जलाभिषेक और रुद्राभिषेक के अलावा कुछ विशेष पूजन सामग्रियों अर्पित करते हैं, जो भगवान शिव को बेहद प्रिय हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस महाशिवरात्रि शिवलिंग पर क्या चढ़ाने से शिवजी प्रसन्न होंगे और इस भोलेनाथ को क्या नहीं चढ़ाना चाहिए. इसके अलावा इस दिन से जुड़े विशेष नियम क्या हैं.

शिव पूजन से जुड़े जरूरी नियम: शिव पूजन में शंख है निषेध- शिवलिंग की पूजा सामान्य मूर्तियों की पूजा से अलग होती है. महादेव की पूजा में शंख बजाना या शंख से जल अर्पित करना पूरी तरह निषेध है. इसका पौराणिक कारण शिवजी द्वारा शंखचूड़ नामक दैत्य का वध करना है, जिसकी अस्थियों से शंख की उत्पत्ति मानी गई है.

शिवलिंग की परिक्रमा का विधान- आमतौर पर अन्य देवताओं की पूरी परिक्रमा की जाती है, लेकिन शिवलिंग की सिर्फ आधी परिक्रमा ही की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भक्तों को कभी भी जलाधारी (सोमसूत्र) को नहीं लांघना चाहिए, क्योंकि वहां से शिव की शक्ति प्रवाहित होती है.

हल्दी और श्रृंगार से करें- परहेज- कहते हैं कि महादेव वैरागी हैं, इसलिए शिवलिंग पर हल्दी, कुमकुम या सिंदूर नहीं चढ़ाया जाता. अगर आप माता पार्वती की प्रतिमा की पूजा कर रहे हैं, तो वहां इन सुहाग सामग्रियों का इस्तेमाल जरूर करें.

बेलपत्र चढ़ाने की सही तरीका- शास्त्रों अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर तीन पत्तों वाला अखंडित (बिना कटा-फटा) बेलपत्र ही अर्पित करें. ध्यान रहे कि बेलपत्र का चिकना हिस्सा शिवलिंग की तरफ होना चाहिए.

पूजन सामग्री से जुड़े विशेष नियम: शास्त्रों के अनुसार, शिव जी की पूजा में उन्हें कुछ फूल अर्पित नहीं किए जाते हैं. शिवपुराण के अनुसार, केतकी, कनेर, कमल और तुलसी के पत्तों शिवलिंग पर न चढ़ाएं. इसके स्थान पर बेलपत्र, धतूरा, भांग और शमी के पत्र अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है.

अक्षत का नियम- महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर टूटे हुए चावल (खंडित अक्षत) न चढ़ाएं. अक्षत पूर्ण और साफ होने चाहिए, अन्यथा पूजा अधूरी मानी जाती है.

महाशिवरात्रि पर भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां

किस धातु के बर्तनों से करें शिवजी की पूजा- शिवजी को दूध या जल अर्पित करने के लिए कांसे के बर्तन का उपयोग अशुभ माना गया है. अभिषेक के लिए सदैव तांबे, चांदी या सोने के पात्रों का ही चुनें.

ना पहनें इस रंग के कपड़े- महाशिवरात्रि के दिन पावन दिन काले वस्त्र पहनकर पूजा करना शुभ नहीं माना जाता। शिव पूजा के लिए सफेद, आसमानी, हल्का पीला या नारंगी रंग सर्वोत्तम है।

आहार पर रखें नियंत्रण- अगर आप महाशिवरात्रि का व्रत न भी रखें, तो भी इस दिन तामसिक भोजन (मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन) से दूरी बनाए रखें.

शुद्धता का रखें खास ख्याल- महाशिवरात्रि व्रत के दौरान किसी की निंदा न करें और न ही क्रोध करें. अपनी ऊर्जा को ‘ॐ नमः शिवाय’ के जाप में लगाएं.

कैसे रखें महाशिवरात्रि व्रत- धार्मिक परंपरा के अनुसार, महाशिवरात्रि का व्रत निर्जला या फलाहारी दोनों तरह से रखा जा सकता है. सूर्यास्त के बाद अनाज का सेवन वर्जित है.

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