भगवान शिव का शृंगार अन्य देवताओं और भगवान से बिल्कुल अलग है जो अनेक अर्थों को लिए हुए हैं. इसी के साथ ही देखने वाली बात ये भी है कि महादेव का 3 अंक से भी गहरा संबंध है. जैसे शिव जी का शस्त्र त्रिशूल है, शिव की आंखें तीन हैं, शिव जी माथे पर त्रिपुंड लगाते हैं. शिव को भक्त तीन पत्ते वाला बेलपत्र अर्पित करते हैं. महाशिवरात्रि की इस विशेष कड़ी में हम महादेव के शृंगार और उनके 3 अंक से संबंध का रहस्य जानेंगे.
शिव जी के श्रृंगार का गहरा अर्थ
शिव जी के माथे पर चंद्रमा: महादेव के मस्तक पर अर्धचंद्र हैं जो बताता है कि काल यानी ‘समय’ महादेव के वश में हैं. मन के कारक चंद्रमा का शिव जी के मस्तक पर होना बताता है कि एक योगी का मन नियंत्रण होना चाहिए.
शिव जी के माथे पर गंगा: शिव जी के माथे पर गंगा का होना ‘ज्ञान’ की अविरल धारा को दर्शाता है. जो बताता है कि ज्ञान का हमेशा बहते रहना जरूरी है.
गले में नागराज का लिपटे रहना: गले में नागराज वासुकी का लिपटे रहना संदेश देता है कि अपने भीतर के ‘अहंकार’ और ‘डर’ को नियंत्रण में रखना चाहिए. तामसी प्रवृत्ति वाले जीव सांप को शिव जी ने अपने वश किया है.
शरीर पर भस्म (विभूति): शिवजी अपने शरीर पर श्मशान की भस्म लगाते हैं जो जीवन के नश्वरता को स्मरण करने का ज्ञान देता है. ऐसा करना बताता है कि शरीर एक दिन मिट्टी में ही मिलेगा ऐसे में सांसारिक मोह-माया में न पड़े और आत्मा शुद्धि पर ध्यान केंद्रित करें.
त्रिशूल और डमरू: शिव का त्रिशूल तीन गुणों- सत्व, रज और तम- पर नियंत्रण का प्रतीक है। वहीं, डमरू की ध्वनि ब्रह्मांड के निर्माण और लय को दर्शाती है। यह सिखाता है कि जीवन में संतुलन और संगीत (लय) का होना बहुत जरूरी है।
शिव जी का 3 अंक से कनेक्शन
शिव जी का शस्त्र त्रिशूल: शिव जी का शस्त्र त्रिशूल है जो त्रिलोक को दर्शाता है. त्रिशूल में आकाश, धरती और पाताल का प्रतीक हैं. भगवत गीता के अनुसार तामसिक गुण, राजसिक गुण व सात्विक गुण त्रिशूल में समाहित है.
शिव जी के तीन नेत्र का रहस्य: शिव जी की तीनों आंखें तपस्या को दर्शाती हैं जिसका उद्देश्य सत, चित्त, आनंद की प्राप्ति से है यानी पूर्ण सत्य, शुद्ध चेतना व पूर्ण आनंद या परम आनंद.
शिव के मस्तक पर तीन आड़ी रेखाएं: शिव जी के मस्तक पर त्रिपुंड लगा होता है जो सांसारिक लक्ष्य को दिखाता है. आत्मरक्षण, आत्मप्रसार के साथ ही आत्मबोध को शिव जी का त्रिपुंड दिखाता है.
तीन पत्तों वाला बेल पत्र: शिव जी को चढ़ाया जाने वाला बेल पत्र हमेशा पदार्थ के गुणों को दर्शाता है. इसका एक पत्ता निष्क्रियता, दूसरा पत्ता उद्वग्निता और तीसरा सामंजस्य को दिखाता है. यह मानव शरीर के गुणों को दिखाता है.
















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