महाशिवरात्रि पर शिवालयों के शहर कानपुर में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा. आनंदेश्वर मंदिर में तड़के डेढ़ बजे मंगला आरती के बाद कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं. हर-हर महादेव के जयघोष के बीच भक्तों ने जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की. मान्यता है कि इस प्राचीन दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है.
बिल्हौर में भूत-भावन भगवान शिव की भव्य बारात निकाली गई. शिवगणों के रूप में सजे कलाकारों ने नरमुंड की माला पहन कर डांस किया. हनुमानजी के रूप में सजे कलाकार ने भी डांस किया, गदा लेकर रथ पर निकले. भगवा झंडे लहराए गए और डीजे की धुन पर युवाओं ने जमकर डांस किया.

डीजे पर युवाओं और बच्चों ने जमकर डांस किया. 11:30 बजे शनि धाम से हुई शुरुआ शिवबारात की शुरुआत त्रिवेणीगंज स्थित शनि धाम से सुबह करीब 11:30 बजे हुई. बारात विजलेश्वर मंदिर, नगरपालिका चौराहा, नेहरू पार्क, कटरा बाजार होते हुए सुभानपुर स्थित शिवाला मंदिर तक पहुंचेगी. आयोजन को लेकर ओंकारेश्वर युवा सेवा समिति ने पिछले दो सप्ताह से तैयारियां की थीं. समिति पिछले 14 वर्षों से लगातार इस परंपरा का निर्वहन कर रही है.
बारात में भूत, प्रेत, पिशाच और गणों के वेश में कलाकार शामिल हुए, जिसने शिवबारात को पारंपरिक और अलौकिक स्वरूप दिया. “हर-हर महादेव” के जयकारों पर महिलाएं और लड़कियां भी भक्ति में सराबोर होकर झूम उठीं. पूरे नगर में शिवमय माहौल देखने को मिला.
इसे लेकर शहर और आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. भीड़ को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात रहा. प्रमुख मार्गों पर डायवर्जन लागू कर वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से निकाला गया. मंदिर प्रशासन ने बैरिकेडिंग, कतारबद्ध दर्शन और पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की. दिनभर दर्शन-पूजन का सिलसिला जारी रहा.

जलाभिषेक के लिए आतुर दिखे भक्त: बता दें कि महाशिवरात्रि पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है. मंदिरों में सजावट की गई है। शहर के शिवालयों में शनिवार रात से ही भक्तों का सैलाब उमड़ने लगा था. भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंधन व जिला प्रशासन ने विशेष तैयारी की है. परमट स्थित आनंदेश्वर मंदिर में शनिवार रात से ही भक्तों की कतारें लगने लगीं. इसके अलावा, नवाबगंज स्थित जागेश्वर मंदिर, जाजमऊ के सिद्धेश्वर और पीरोड के बनखंडेश्वर मंदिर में भी भक्त जलाभिषेक के लिए आतुर दिखे.
जलाभिषेक का विशेष महत्व: महाशिवरात्रि पर भगवान शिव और मां पार्वती की विशेष पूजा का विधान है. शिवपुराण के अनुसा., भगवान शिव के निराकार स्वरूप का प्रतीक लिंग इस पावन तिथि की महानिशा में प्रकट हुआ था और इसे सबसे पहले ब्रह्मा व विष्णु ने पूजा। महाशिवरात्रि मानवता के लिए भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का एक पवित्र अवसर है. इस दिन शिवलिंग का पूजन और जलाभिषेक करने से तुरंत फाल प्राप्त होता है.
















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