मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 31 में से 30 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई. इसमें सबसे बड़ा फैसला जमीन की रजिस्ट्री को लेकर हुआ है. अब खतौनी की जांच के बिना जमीन की रजिस्ट्री नहीं होगी.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लोक भवन में आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रदेश के विकास और सुशासन से जुड़े 30 प्रस्तावों पर मुहर लगा दी गई. सरकार ने जमीनों की रजिस्ट्री में होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं, वहीं ग्रामीण परिवहन और सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली में भी बड़े बदलाव किए गए हैं. कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना, रविंद्र जायसवाल, दयाशंकर सिंह ने अलग अलग विभागों के प्रस्तावों को मिली मंजूरी के बारे में बताया.
रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा: कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए स्टांप मंत्री रविंद्र जायसवाल ने कहा कि योगी सरकार ने जमीनों की खरीद-फरोख्त में होने वाली धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए ‘स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग’ के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत अब रजिस्ट्री से पहले खतौनी और स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन अनिवार्य होगा. इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद बिना राजस्व रिकॉर्ड की जांच किए कोई भी रजिस्ट्री संभव नहीं होगी. इससे न केवल आम आदमी का पैसा सुरक्षित रहेगा, बल्कि भू-माफियाओं के सिंडिकेट पर भी सीधी चोट होगी.
मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना का आगाज: परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि ग्राम परिवहन योजना स्वीकृत हुई है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों के लिए कैबिनेट ने एक बड़ी सौगात दी है. प्रदेश में ‘मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना’ को हरी झंडी दे दी गई है. इस योजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश के 12,200 दूर-दराज के गांवों तक सीधी बस सेवा पहुंचाई जाएगी. इससे ग्रामीण इलाकों में रहने वाले छात्रों, किसानों और मरीजों को शहरों तक आने-जाने में भारी सुविधा होगी.
परिवहन विभाग जल्द ही इन रूटों पर छोटी और मझोली बसों का संचालन शुरू करेगा. रात में सभी बसें गांवों में पहुंच जाएंगी और वहीं रुकेंगी. इसके बाद सुबह दस बजे से पहले वहां से चलकर जिला मुख्यालयों के लिए रवाना होंगी. यह छोटी बसें यानी 28 सीटर होंगी ताकि गांवों में आसानी से चल सकें. चार बजे से रात आठ बजे के बीच यह बसें दोबारा गांवों में चली जाएंगी. इन बसों से टैक्स नहीं लिया जाएगा और न ही परमिट की जरूरत होगी. यूपी के सभी गांव बस सेवा से कवर हो जाएंगे. बस का एक गांव में कम से कम दो चक्कर जरूर लगेगा. किराए का निर्धारण जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी तय करेगी.
ओला-उबेर को रजिस्ट्रेशन कराना होगा: इसके अलावा ओला उबेर जैसी गाड़ियों पर नियंत्रण के लिए इन्हें भी अब परिवहन विभाग में रजिस्ट्रेशन कराना होगा. इसका आवेदन शुल्क 25000 रुपये रखा गया है. अगर कोई कंपनी आवेदन करती है तो उसे 5 लाख रुपए देना होगा। रिनीवल के लिए पांच हजार देना होगा. पांच साल में एक बार रिनीवल होगा। भारत सरकार ने पहले ही इस पर नियम बना चुकी है. उसी नियम को राज्य सरकार ने अपने यहां लागू करने की मंजूरी दे दी है.
कर्मचारी आचरण नियमावली में संशोधन: सरकारी कर्मचारियों के लिए कार्मिक विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए ‘आचरण नियमावली’ को और सख्त बनाया गया है. अब यदि कोई सरकारी कर्मचारी अपने दो माह के मूल वेतन से अधिक मूल्य की किसी भी चल संपत्ति (जैसे वाहन, सोना या अन्य निवेश) का लेनदेन करता है, तो उसे इसकी अनिवार्य सूचना अपने संबंधित सक्षम प्राधिकारी को देनी होगी. यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है. इसके अलावा छह माह के मूल वेतन से ज्यादा शेयर मार्केट में लगाने पर घोषणा करनी होगी.
आवास विभाग की ‘ओटीएस’ (OTS) योजना: घर खरीदारों को राहत देते हुए आवास विभाग ने विकास प्राधिकरणों और आवास विकास परिषद के डिफॉल्टरों के लिए ‘वन टाइम सेटलमेंट’ (ओटीएस) योजना शुरू करने का फैसला लिया है. इसका सीधा लाभ प्रदेश के करीब 19 हजार डिफॉल्टरों को मिलेगा, जो ब्याज और जुर्माने के कारण अपने बकाये का भुगतान नहीं कर पा रहे थे. इसके अलावा, पीएम आवास योजना (शहरी) और मुख्यमंत्री विस्तारीकरण योजना के तहत आठ शहरों में ‘अफोर्डेबल हाउसिंग’ प्रोजेक्ट्स के लिए बजट को भी स्वीकृति दी गई है. इसमें तीन महीने का समय पैसा जमा करने के लिए दिया जाएगा.
















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