ईरान ने अमेरिका के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही होर्मुज में अपनी सख्ती दिखा दी. ईरानी नौसेना ने चेतावनी दी है कि बिना तेहरान की अनुमति के कोई भी जहाज स्ट्रेट में प्रवेश करने की कोशिश करेगा तो उसे नष्ट कर दिया जाएगा. बुधवार को ईरानी नौसेना ने समुद्री मार्ग के पास मौजूद जहाजों को रेडियो संदेश भेजकर स्पष्ट किया कि होर्मुज पार करने के लिए ईरानी सेपाह नौसेना से अनुमति लेना अनिवार्य है. संदेश में कहा गया कि होर्मुज से गुजरने के लिए आपको ईरानी सेपाह नौसेना से अनुमति लेनी होगी। यदि कोई भी पोत बिना अनुमति के गुजरने का प्रयास करता है, तो उसे नष्ट कर दिया जाएगा। यूं कहा जाए तो उड़ा दिया जाएगा.
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, चालक दल द्वारा साझा किए गए ऑडियो में यह चेतावनी दर्ज की गई है. वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया कि अधिकांश जहाज अभी भी होर्मुज में स्थिर हैं, और ईरान इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अपना प्रभाव बनाए रखने का इरादा जताता दिख रहा है. फारस की खाड़ी के ऊपर युद्धक विमान अभी भी तैनात हैं. यह घटनाक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा के ठीक बाद सामने आया है.
बता दें कि ईरान और ओमान के बीच स्थित यह समुद्री मार्ग मात्र 34 किलोमीटर चौड़ा है, जो खाड़ी को हिंद महासागर से जोड़ता है. दुनिया की लगभग एक-पांचवीं तेल आपूर्ति और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं का परिवहन इसी मार्ग से होता है. करीब छह सप्ताह से चल रहे संघर्ष में यह युद्ध का केंद्र बिंदु बना रहा.
दो सप्ताह के लिए सीजफायर: ट्रंप ने मंगलवार को कहा था कि वे ईरान पर हमले दो सप्ताह के लिए निलंबित करने पर सहमत हुए हैं, बशर्ते होर्मुज को ‘पूर्ण, तत्काल और सुरक्षित’ तरीके से खोल दिया जाए. ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए उन्होंने यह फैसला लिया है. उन्होंने कहा कि यह दोतरफा युद्धविराम होगा। इससे पहले ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी कि यदि समझौता नहीं हुआ तो एक पूरी सभ्यता का अंत हो जाएगा.
ईरान बोले- यह युद्ध का अंत नहीं: दूसरी ओर ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने युद्धविराम स्वीकार कर लिया है, लेकिन स्पष्ट किया है कि यह युद्ध का अंत नहीं है. तेहरान ने कहा कि यदि दुश्मन कोई गलती करता है तो पूर्ण शक्ति से जवाब दिया जाएगा. रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच आगे की बातचीत पाकिस्तान में होने वाली है. इस युद्धविराम को क्षेत्रीय शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, हालांकि दोनों ओर से सतर्कता बरती जा रही है.














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