मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच देश के आम आदमी पर एक बार फिर से महंगाई की मार पड़ी है. पेट्रोल-डीजल की कीमत में जारी तेजी का सिलसिला बना हुआ है. दो हफ्ते से भी कम समय में तेल कंपनियों ने चार बार दाम में इजाफा कर दिया है. असर यह हुआ कि 11 दिन में पेट्रोल और डीजल 7 रुपये से भी ज्यादा महंगा हो गया. तेल की कीमत में अचानक आए बदलाव से आम आदमी के बजट पर भी असर पड़ना तय है. बाजार में माल ढुलाई महंगी होने के कारण आने वाले दिनों में फल, सब्जी और राशन के दाम बढ़ने का खतरा बना हुआ है. आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल के रेट का क्या हाल रहेगा? यह एक बड़ा सवाल है-
ग्लोबल लेवल पर क्रूड ऑयल (Crude Oil) के मार्केट में मची उथल-पुथल का असर सीधे भारतीय ग्राहकों की जेब पर दिखने लगा है. इंटरनेशलन मार्केट में ब्रेंट क्रूड की कीमत रिकॉर्ड लेवल पर हैं. दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों (OPEC+) की तरफ से प्रोडक्शन में कटौती जारी रखने और ग्लोबल लेवल पर चल रही जियो पॉलिटिकल टेंशन के कारण क्रूड ऑयल की सप्लाई चेन पर असर पड़ा है. भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. इस कारण इंटरनेशनल मार्केट में होने वाली हर हलचल का असर घरेलू बाजार पर देखा जाता है.
आज की तेजी से बेहाल हुई जनता: सोमवार सुबह 6 बजे जैसे ही पेट्रोल-डीजल के रेट में करीब 3 रुपये की तेजी का अपडेट आया तो आम आदमी का चेहरा मुरझा गया. महानगरों से लेकर छोटे कस्बों तक में रहने वाले लोगों के बीच इसको लेकर चर्चा होने लगी. पिछले 11 दिन में पेट्रोल-डीजल के दाम में आ रही लगातार तेजी से पेट्रोल के दाम फिर रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गए हैं. मिडिल क्लास इस बात से सबसे ज्यादा परेशान है कि पिछले दो हफ्ते के दौरान उनकी गाड़ी का तेल खर्च 10 फीसदी तक बढ़ गया है. दाम में इजाफे का असर आने वाले समय में धीरे-धीरे घरेलू बजट पर भी दिखाई देगा.
पेट्रोल और डीजल का आगे क्या रहेगा रुख? भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड (BPCL) के डायरेक्टर (HR) राज कुमार दुबे ने एक दिन पहले ही कहा था यदि ग्लोबल एनर्जी क्राइसिस और वेस्ट एशिया में तनाव लंबा खिंचा तो पेट्रोल-डीजल की कीमत में और बढ़ोतरी हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि क्रूड ऑयल की कीमत में लगातार तेजी और सप्लाई चेन टूटने से तेल कंपनियां भारी दबाव में हैं. ऐसे में सरकार और तेल कंपनियों के पास लिमिटेड ऑप्शन बचे हैं. दुबे ने साफ कहा, इसके तीन ऑप्शन हैं. पहला यह कि या तो पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए जाएं या तेल कंपनियां घाटा सहती रहें अथवा सरकार घाटे की भरपाई करे.
तेल कंपनियों को कितना नुकसान? विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा था कि आने वाले समय में तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़ा सकती हैं. उस समय केंद्रीय पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी ने कहा था मौजूदा फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की पहली तिमाही में तेल कंपनियों का घाटा बढ़कर एक लाख करोड़ से सवा लाख करोड़ तक पहुंच सकता है. इससे अंदाजा लगाया गया कि सरकारी कंपनियों को रोजाना करीब 1,100 करोड़ का भारी नुकसान हो रहा है. ऐसे में पेट्रोल-डीजल की कीमत में की जा रही हालिया बढ़ोतरी घाटे खत्म करने के लिए नहीं, बल्कि कंपनियों को होने वाले बड़े नुकसान के असर को कम करने की कोशिश है.
कंपनियों के घाटे में कितनी आई कमी? तेल कंपनियों की तरफ से पेट्रोल-डीजल के रेट में 7 रुपये से ज्यादा का इजाफा किया गया है. 15 और 19 मई को जब कीमत में इजाफा किया गया तो एक आंकड़े में बताया गया कि तेल कंपनियों के घाटे में 163 करोड़ रुपये रोजाना की कमी आई है. तब तक दो बार में कीमत 3.9 रुपये बढ़ गई थी. उसके बाद तीसरी बार में पेट्रोल 87 पैसे और चौथी बार में 2.61 रुपये महंगा हो गया है. यानी इन दो बार में भी पेट्रोल-डीजल 3.5 रुपये महंगा हुआ है, जिससे यह उम्मीद की जा रही है कि दाम में बढ़ोतरी से तेल कंपनियों का कुल 300 रुपये का घाटा रिकवर हुआ है. ऐसे में रोजाना 1100 करोड़ का घाटा घटकर 800 करोड़ के करीब रह गया है. इस हिसाब से आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ाने से इनकार नहीं किया जा सकता.













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