पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का प्रचार अपने चरम पर है, लेकिन रैलियों और बयानों के बीच एक अनोखी घटना ने सबका ध्यान खींचा है. मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सड़क किनारे खाई गई 10 रुपये की ‘झालमुड़ी’ और उसके बदले दिए गए 10 रुपये के नोट से जुड़ा है, जो अब एक ‘अनमोल धरोहर’ बन गया है.
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी झाड़ग्राम में एक चुनावी रैली को संबोधित करने पहुंचे थे. रैली के बाद लौटते समय पीएम का काफिला सड़क किनारे एक झालमुड़ी बेचने वाले दुकानदार के पास रुका. प्रधानमंत्री ने वहां रुककर बड़े चाव से 10 रुपये की झालमुड़ी खाई और दुकानदार को भुगतान के रूप में 10 रुपये का एक नोट दिया.
दुकानदार की चमकी किस्मत: झालमुड़ी विक्रेता के लिए यह पल किसी सपने जैसा था। जैसे ही यह खबर फैली कि प्रधानमंत्री ने इस दुकान पर झालमुड़ी खाई है, वहां लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा लेकिन असली कहानी तब शुरू हुई जब लोगों को पता चला कि प्रधानमंत्री द्वारा दिया गया वह 10 रुपये का नोट अभी भी दुकानदार के पास है.
1 लाख रुपये तक पहुंची बोली: देखते ही देखते उस 10 रुपये के नोट को खरीदने के लिए लोगों में होड़ मच गई. स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ उत्साही प्रशंसकों और संग्रहकर्ताओं ने उस नोट के लिए ऊंची बोलियां लगानी शुरू कर दीं. हैरानी की बात यह है कि सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, इस मामूली नोट की कीमत 1 लाख रुपये तक की बोली तक पहुंच गई है. लोग इसे सौभाग्य का प्रतीक और ऐतिहासिक दस्तावेज मान रहे हैं.
दुकानदार का फैसला: नोट के लिए भारी-भरकम रकम मिलने के बावजूद दुकानदार फिलहाल इसे बेचने के मूड में नहीं दिख रहा है. उसका कहना है कि प्रधानमंत्री का उसकी दुकान पर आना और अपने हाथों से नोट देना उसके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है. वह इस नोट को फ्रेम करवाकर अपनी दुकान में यादगार के तौर पर रखना चाहता है.
सोशल मीडिया पर इस घटना के वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं. जहां भाजपा समर्थक इसे प्रधानमंत्री की सादगी और जनता के बीच उनकी लोकप्रियता से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं विपक्षी खेमे में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं.
















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