नितिन नबीन की सीट पर PK जीते, bjp प्रत्याशी को 19324 वोट से हराया; दतिया में कांग्रेस जीती

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बांकीपुर उपचुनाव में जनसुराज के प्रशांत किशोर की प्रचंड जीत हुई है. 31 राउंड की वोटिंग में पीके को 63203 वोट मिले. वहीं दूसरे नंबर पर बीजेपी के नीरज सिन्हा रहे। जिन्हें 44250 और आजेडी की रेखा कुमारी को 14085 वोट मिले हैं. मतगणना में शुरू से ही जनसुराज पार्टी (JSP) के नेता प्रशांत किशोर लीड बनाए हुए थे. जो आखिर तक जारी रही। आपको बता दें 30 जुलाई को बांकीपुर उपचुनाव के लिए मतदान हुआ था. और करीब 35 फीसदी वोटिंग हुई थी.

इधर, MP के दतिया में कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने 6,016 वोटों से जीत दर्ज की. भाजपा ने यहां पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था. आशुतोष नरोत्तम मिश्रा के पोलिंग बूथ पर भी नहीं जीत पाए.

गुजरात के मांजलपुर में भाजपा के सतेन्द्रभाई (सतीश) पटेल ने 30630 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की. उन्होंने कांग्रेस के भिखाभाई रबारी को हराया। तीनों सीटों पर 30 जुलाई को वोटिंग हुई थी.

बीजेपी के गढ़ में जन सुराज का बड़ा धमाका: बांकीपुर विधानसभा सीट काफी वक्त से बीजेपी की मजबूत गढ़ मानी जाती रही है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई इस सीट पर पार्टी ने नीरज सिन्हा को अपना प्रत्याशी बनाया था. हालांकि, शुरुआती राउंड की मतगणना से ही जन सुराज के प्रशांत किशोर ने जो बढ़त बनानी शुरू की, वह आखिरी राउंड तक लगातार बढ़ती चली गई. 31वें और अंतिम राउंड की मतगणना पूरी होने के बाद प्रशांत किशोर ने जीत हासिल की.

तीसरे नंबर पर खिसका राजद: वहीं, इस चुनाव में राजद का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा. राजद उम्मीदवार रेखा गुप्ता महज 14,085 वोटों पर सिमट कर तीसरे स्थान पर रहीं. चुनाव नतीजों ने यह साफ संकेत दिया है कि बांकीपुर के मतदाताओं ने पारंपरिक गठबंधनों से हटकर प्रशांत किशोर के जन सुराज विकल्प पर भरोसा जताया है.

बांकीपुर का सामाजिक और सियासी ताना-बाना: बांकीपुर विधानसभा सीट को बीजेपी की पारंपरिक सीट मानी जाती रही है. यहां शहरी आबादी है, जो ज्यादातर साक्षर और मध्य वर्ग वाला है. ऐसे में यहां तीसरे विकल्प के रूप में खुद को स्थापित करना प्रशांत किशोर के लिए आसान नहीं था. प्रशांत किशोर ने यहां के कोर-अर्बन मुद्दों- जैसे जलजमाव, ट्रैफिक, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और युवाओं के अवसर को सीधे चुनावी अभियान का हिस्सा बनाया.

‘जन सुराज’ की रणनीति: इस उपचुनाव में टीम प्रशांत किशोर ने युवाओं पर अपना फोकस केंद्रित किया. बांकीपुर में जो पहले धारणा बन रही थी कि कोई बीजेपी और महागठबंधन का वि​कल्प नहीं बन सकता, उस पर करारी चोट की. वे खुद एक विकल्प के रूप में पेश हुए और जनता की भावनाओं को कुरेदकर उनके जख्मों पर आश्वासन का मरहम लगाकर अपनी ओर वोट बटोरने में कामयाब हो गए.

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