इरशाद खान, हमीरपुर।
हमीरपुर में नाव पलटने के मामले में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति आज घटनास्थल पर पहुंची और शोक संतप्त परिवारों से मिलकर ढांढस बंधाया और प्रत्येक मृतक परिवार के परिवार वालों को 4-4 लाख मुवाअजे का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि जिनके खाते बैंक में नहीं खुले हैं उनके खाते खुलवाकर उन तक मुआवजा राहत राशि दी जाएगी. साध्वी निरंजन ज्योति ने घटनास्थल पर मौजूद जिला प्रशासन की टीम को दिए निर्देश मौके पर रहकर गंभीरता से रेस्क्यू अभियान को तेज करें.
मालूम हो कि बुधवार शाम को यमुना नदी में नाव पलट गई. नाव में 8 बच्चों समेत 9 लोग सवार थे. नाविक ने 3 को बचा लिया, लेकिन एक महिला और 5 बच्चे यानी 6 लोग डूब गए. गुरुवार दोपहर तक 5 शव बरामद किए जा चुके हैं. बारिश के बीच एक बच्चे की तलाश के लिए यमुना में रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है. एनडीआरएफ, फ्लड पीएसी के 100 जवानों की टीम रेस्क्यू में जुटी है.
अधिकारियों का कहना है कि नदी काफी गहरी होने की वजह से गोताखोरों को रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कत आ रही है. इस वजह से नावों को गोल-गोल पानी में घुमाया जा रहा है, ताकि अगर कोई नीचे दबा हो तो पानी के प्रेशर से बाहर आ जाए. थोड़ी देर में टीम नदी में जाल डालकर बच्चे को तलाशने की कोशिश करेगी.

डूबे बच्चों के मां-बाप और परिवार के लोग घाट किनारे बैठे हुए हैं। एक बच्चे की मां अफसरों के सामने हाथ जोड़कर बोली- साहब, मेरा बच्चा ले आइए. हादसा बुधवार शाम 6 बजे का है। आंधी-बारिश की वजह से रात 11 बजे रेस्क्यू रोकना पड़ा. गुरुवार सुबह 6 बजे से 10 नाव से रेस्क्यू शुरू किया गया। 3 घंटे बाद सुबह 9 से 10 बजे के बीच में 3 और दोपहर एक बजे 2 शव बरामद किए.
ये शव ब्रजरानी (25) और दो बच्चियों अर्चना (14), रानी (9), लव्यांश (5) और आकांक्षा (9) के हैं. 11 साल का आदित्य अब भी लापता हैं. हादसास्थल जिला मुख्यालय से 25 किमी दूर कुरारा थाना क्षेत्र में है. सभी बच्चे नाव पर सवार होकर नदी के पार एक टापू पर खरबूजा-ककड़ी खाने गए थे. लौटते समय नदी के बीच नाव पलट गई.

मामला कुरारा थाना क्षेत्र के भौली ग्राम पंचायत के मजरा कुतुबपुर पटिया का है। यह गांव यमुना नदी के किनारे बसा है. गांव निवासी श्रीपाल की बेटी की मंगलवार (5 मई) को शादी थी.
बुधवार (6 मई) को विदाई के बाद शाम करीब 6 बजे रिश्तेदारी में आए नाविक धीरू समेत 10 लोग नाव से यमुना पार चले गए. वहां पर सभी ने खरबूजा और ककड़ी खाई। फिर सभी नाव से लौट रहे थे. लेकिन, यमुना नदी में अचानक नाव का संतुलन बिगड़ गया और पलट गई. नाव धीरू चला रहा था. उसने विष्णु, रिंकू और पारुल को सुरक्षित बचा लिया, लेकिन दुल्हन की मौसेरी बहन आकांक्षा (9), चचेरी बहन रानी (9), अर्चना (14), मौसी ब्रजरानी (25), मौसेरा भाई लव्यांश (5) और बुआ का बेटा आदित्य (11) डूब गए.
















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