CM योगी को बम से उड़ाने की धमकी देने वाला सफाई कर्मचारी गिरफ्तार

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UP के शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद नगर पालिका में तैनात एक सफाई कर्मचारी, नितेश कटियार, ने प्रतिशोध की ऐसी खतरनाक पटकथा लिखी जिससे न केवल पुलिस बल्कि राज्य की सुरक्षा एजेंसियां भी हैरान रह गईं. आरोपी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बम से उड़ाने की धमकी भरा संदेश सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. यह धमकी किसी सामान्य शरारत के इरादे से नहीं, बल्कि एक निर्दोष व्यक्ति को सलाखों के पीछे भेजने के लिए दी गई थी.

साजिश के पीछे का कारण: मामले की जड़ें एक टूटी हुई सगाई से जुड़ी हैं. जानकारी के अनुसार, नितेश कटियार का रिश्ता एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट के जरिए प्रयागराज के रहने वाले एक इंजीनियर, पवन चौरसिया की बहन से तय हुआ था. हालांकि, किन्हीं कारणों से यह सगाई टूट गई. रिश्ता टूटने से नितेश बुरी तरह आहत और नाराज था और उसने पवन चौरसिया को सबक सिखाने की ठान ली.

फंसाने के लिए डिजिटल जाल: पवन चौरसिया को फंसाने के लिए नितेश ने बड़ी चालाकी से उसके नाम और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया. उसने सोशल मीडिया पर एक संदेश पोस्ट किया जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी.  इस संदेश में पहचान के तौर पर पवन का विवरण दिया गया था, ताकि पुलिस सीधे पवन तक पहुंचे.

पुलिस और खुफिया एजेंसियों की कार्रवाई: मुख्यमंत्री को धमकी मिलने के बाद पुलिस महकमे और खुफिया एजेंसियों में हड़कंप मच गया. प्राथमिक जांच के आधार पर पुलिस ने प्रयागराज से पवन चौरसिया को हिरासत में ले लिया. लेकिन मामला जितना सीधा दिख रहा था, उतना था नहीं. साइबर सेल ने जब गहराई से पड़ताल की, तो डिजिटल साक्ष्य कुछ और ही कहानी बयां करने लगे.

साइबर सेल का खुलासा और गिरफ्तारी: जांच टीम ने जब धमकी भरे संदेश की मोबाइल लोकेशन और आईपी एड्रेस को ट्रैक किया, तो उसकी लोकेशन प्रयागराज के बजाय शाहजहांपुर के जलालाबाद में मिली. पुलिस की जांच की सुई नितेश कटियार की ओर मुड़ गई. प्रयागराज पुलिस ने जलालाबाद पहुंचकर नितेश को गिरफ्तार कर लिया.

आरोपी का कबूलनामा: पुलिस की कड़ी पूछताछ के सामने नितेश ज्यादा देर तक टिक नहीं पाया और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उसने स्वीकार किया कि पवन चौरसिया से बदला लेने के लिए ही उसने यह पूरी साजिश रची थी. फिलहाल, प्रयागराज पुलिस आरोपी को अपने साथ ले गई है और मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही की जा रही है. इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया के दुरुपयोग और डिजिटल साक्ष्यों की महत्ता को रेखांकित किया है.

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