पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में यूपी के नेताओं में सीएम योगी ने सबसे ज्यादा 35 विधानसभा सीटों पर प्रचार किया था. इनमें से 85% यानी 30 सीटों पर भाजपा प्रत्याशी फतह कर चुके है.
सीएम ने असम की दो सीटों पर भी प्रचार किया था. इनमें से एक पर भाजपा और दूसरे पर सहयोगी असम गण परिषद के प्रत्याशी जीते है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 6 सीटों पर प्रचार किया. इनमें से 4 सीटों (66%) पर भाजपा प्रत्याशी आगे हैं. डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की प्रचार वाली 55% सीटों पर भाजपा प्रत्याशी बढ़त बनाए हुए हैं.
सीएम योगी ने 27 अप्रैल को कल्याणी सीट पर रोड के दौरान और भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या के साथ सेल्फी वीडियो बनाया था. सीएम योगी ने 5 मुद्दों पर TMC को घेरा था-
1. भाजपा कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न: सीएम योगी ने बंगाल की बदहाली पर तीखा प्रहार करते हुए कहा, तृणमूल के शासन में भारी तांडव हुआ. स्वरूप घोष, पलाश घोष और उत्पल दास जैसे भाजपा कार्यकर्ताओं के घरों को उजाड़ दिया गया. उन्होंने बंगाल की डेमोग्राफी बदलने वाले वोटबैंक के सौदागरों पर निशाना साधा और बांग्लादेश में दलित हिंदुओं की हत्या पर ममता दीदी के मौन पर सवाल उठाए.
2. बालू, जमीन और पशु माफिया के सहारे कटमनी: सीएम योगी ने तृणमूल कांग्रेस की सरकार में सैंड, कोल, लैंड और कैटल माफिया का मुद्दा उठाया. कहा कि ये बंगाल को चूस रहे हैं. 15 साल में TMC ने बंगाल को टेरर, माफियाराज, कटमनी और भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया.
3. पश्चिम बंगाल की डेमोग्राफी बदल रही: सीएम योगी अपनी हर सभा में जनता से सवाल करते रहे कि बंगाल की पहचान काबा से नहीं, मां कालीबाड़ी से है. फिर ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी पर कटाक्ष करते हुए कहते कि बुआ-भतीजे बंगाल का अस्तित्व मिटाना चाहते हैं.
4. यूपी मॉडल vs बंगाल की दुर्दशा: सीएम योगी ने हर सभा में दोहराया कि 2017 से पहले यूपी का हाल भी बंगाल की तरह ही था. वे अपने भाषण में कहते, “पहले यूपी में त्योहारों पर दंगे होते थे, कर्फ्यू लगता था. 2017 में डबल इंजन सरकार बनी तो सब बदल गया. अब नो कर्फ्यू, नो दंगा. गुंडों-माफियाओं को बुलडोजर ने जहन्नुम भेज दिया. यूपी अब देश की इकोनॉमी का ग्रोथ इंजन बन गया है.”
5. बंगाल के गौरवशाली इतिहास का जिक्र: सीएम सभाओं में बंगाल के स्वर्णिम अतीत को याद दिलाते हुए कहते थे कि बंगाल ने देश को अध्यात्म, संस्कृति, कला और शिक्षा दी. एक समय बंगाल, भारत की जीडीपी की रीढ़ था. कांग्रेस, वामपंथ और फिर TMC ने इसे कंगाल बना दिया. 1905 के बंग-भंग विरोध और स्वदेशी आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने बंगालियों से फिर से एकजुट होने की अपील की.















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