13 मई को अपरा एकादशी, न करें ये गलतियां; पानी की तरह बहकर बर्बाद होगा पैसा

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एकादशी तिथि को बहुत खास माना गया है जिसमें अपरा एकादशी को विशेष दर्जा दिया गया है. अपरा एकादशी व्रत लेकिन ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है. अपरा से अर्थ है वह तिथि जो अपार पुण्य और लाभ दे. इस साल अपरा एकादशी 13 मई 2026 को है. 

पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि की शुरुआत 12 मई 2026 की रात 09:56 बजे से होगी और 13 मई 2026 को दोपहर 01:29 बजे समापन होगा. लिहाजा उदयातिथि के आधार पर 13 मई को एकादशी व्रत रखा जाएगा. वहीं इसका पारण 14 मई 2026 की सुबह 06:00 से 07:41 के बीच करना उचित होगा. 

एकादशी पर करें तुलसी पूजन: एकादशी व्रत भगवान विष्‍णु को समर्पित है. इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त पूजा करने से धन-समृद्धि, सौभाग्‍य बढ़ता है. साथ ही व्यक्ति को प्रेत योनी और अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है. साथ ही इस दिन तुलसी से जुड़ी कुछ बातों का ध्‍यान रखना चाहिए, वरना दरिद्रता घेर लेती है.

धन प्राप्ति के अचूक उपाय: अगर कड़ी मेहनत के बाद भी पैसा नहीं टिकता या व्यापार में घाटा हो रहा है, तो इस एकादशी पर ये 3 उपाय जरूर आजमाएं:

पीली कौड़ी का उपाय: एकादशी की सुबह भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के चरणों में 5 पीली कौड़ियां अर्पित करें. पूजा संपन्न होने के बाद इन्हें लाल रेशमी कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी में रख दें. यह उपाय धन को आकर्षित करने की चुंबकीय शक्ति रखता है.
दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक: धन की देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए दक्षिणावर्ती शंख में केसर मिला हुआ दूध भरें, उससे भगवान विष्णु का अभिषेक करें. इससे घर में कभी अन्न और धन की कमी नहीं होती.
केसर और हल्दी का तिलक: इस दिन श्रीहरि को हल्दी और केसर का तिलक लगाएं. साथ ही अपने घर के मुख्य द्वार पर हल्दी से स्वास्तिक बनाएं. इससे नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं कर पाती.

तुलसी पूजन में न करें ये 5 गलतियां: तुलसी को भगवान विष्णु की प्रिया माना जाता है, इसलिए एकादशी के दिन उनकी पूजा में सावधानी बरतना बहुत जरूरी है. इन गलतियों से माता लक्ष्मी रुष्ट हो सकती हैं:
जल न चढ़ाएं: एकादशी के दिन तुलसी के पौधे में जल अर्पित करना वर्जित है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन माता तुलसी भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. जल देने से उनका व्रत खंडित हो जाता है.
पत्ते न तोड़ें: एकादशी तिथि पर तुलसी के पत्ते तोड़ना महापाप माना गया है. यदि आपको भोग के लिए पत्तों की आवश्यकता है, तो उन्हें एक दिन पहले (दशमी) को ही तोड़कर रख लें.
स्पर्श से बचें: सूर्यास्त के बाद या अशुद्ध अवस्था (बिना स्नान किए) में तुलसी को स्पर्श न करें. शाम के समय केवल घी का दीपक जलाकर दूर से ही प्रार्थना करें.
सूखी तुलसी: घर में सूखी हुई तुलसी रखना दुर्भाग्य का प्रतीक है. यदि पौधा सूख गया है, तो उसे ससम्मान किसी नदी में प्रवाहित कर नया पौधा लगाएं.
तामसिक भोजन: जिस घर में तुलसी हो और एकादशी का व्रत हो, वहां मांस, मदिरा या प्याज-लहसुन का प्रयोग करने से लक्ष्मी जी घर त्याग देती हैं.

शाम को करें तुलसी पूजा: विष्‍णु जी और माता लक्ष्‍मी की कृपा पाने के लिए एकादशी की शाम को तुलसी की पूजा करें. इसके लिए दूर से ही तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक रखें. ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें. फिर तुलसी के पौधे की परिक्रमा करें. इससे घर में समृद्धि, सकारात्‍मक बढ़ती है. सौभाग्‍य बढ़ता है.

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