लखनऊ में सीएम योगी की अध्यक्षता में सोमवार को कैबिनेट बैठक हुई. इसमें नए मंत्री भूपेंद्र चौधरी और मनोज पांडेय शामिल हुए। कैबिनेट से लखनऊ मेट्रो के विस्तार समेत 12 प्रस्तावों पर मुहर लगी. इनमें सबसे अहम दो प्रस्ताव हैं.
पहला- पंचायत चुनाव कराने के लिए OBC आयोग के गठन को मंजूरी दी गयी. यह आयोग पंचायत चुनाव में आरक्षण तय करेगा. इसके बाद ही पंचायत कराये जाएंगे. आयोग में 5 सदस्य होंगे. हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज को अध्यक्ष बनाया जाएगा. इनका कार्यकाल 6 महीने का होगा. यानी नवंबर 2026 तक आयोग की रिपोर्ट सामने आ सकती है. इसके बाद ही आरक्षण तय हो सकेगा.
इसलिए साफ है कि पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव 2027 के बाद ही हो सकेंगे. 4 फरवरी 2025 को हाईकोर्ट ने आयोग गठन का आदेश दिया था.
दूसरा प्रस्ताव- पशु चिकित्सा (वेटनरी) में पढ़ने वाले छात्रों का इंटर्नशिप भत्ता 8 हजार बढ़ाकर 12 हजार किया गया है. प्रदेश के कॉलेजों में BVSc & AH (बैचलर ऑफ वेटनरी साइंस एंड एनिमल हसबेंड्री) में हर साल करीब 2,000 से 2,500 छात्र प्रवेश लेते हैं. सभी बैचों को मिलाकर यूपी में 10 हजार से अधिक वेटनरी छात्र पढ़ाई कर रहे.
क्यों हो रहा पिछड़ा आयोग का गठन: पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट और सर्वे के आधार पर ही यह तय होगा कि आपके क्षेत्र की कौन-सी पंचायत सीट ओबीसी (महिला या पुरुष) के लिए आरक्षित होगी और कौन-सी सामान्य रहेगी.
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि स्थानीय निकायों (जैसे ग्राम पंचायत, जिला पंचायत) में ओबीसी आरक्षण देने से पहले राज्यों को ‘ट्रिपल टेस्ट’ की प्रक्रिया पूरी करनी होगी.
इस आयोग का गठन इसी ट्रिपल टेस्ट को पूरा करने के लिए किया गया है. अगर सरकार बिना आयोग की रिपोर्ट के सीधे आरक्षण लागू कर देती, तो मामला अदालत में फंस सकता था और पंचायत चुनावों पर रोक लग सकती थी. आयोग के गठन से अब चुनाव कानूनी रूप से सुरक्षित तरीके से कराए जा सकेंगे.
आयोग के 3 मुख्य काम होंगे
आंकड़े जुटाना- आयोग यह जांच करेगा कि स्थानीय निकायों (ब्लॉक और पंचायत स्तर पर) में पिछड़ी जातियों की आबादी कितनी है और उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व की कितनी आवश्यकता है। इसी आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी.
50% की सीमा का ध्यान रखना- आयोग यह सुनिश्चित करेगा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग तीनों को मिलाकर कुल आरक्षण 50% से अधिक न हो.
आरक्षण का अनुपात तय करना- आयोग की सिफारिशों के आधार पर हर स्थानीय निकाय में ओबीसी आबादी के अनुपात के अनुसार आरक्षित सीटों की संख्या तय की जाएगी.
इसी महीने पूरा हो रहा पंचायत सदस्यों का कार्यकाल यूपी में पिछला पंचायत चुनाव 2021 में हुआ था. पंचायतों का 5 साल का कार्यकाल 25-26 मई 2026 तक पूरा हो रहा है. संवैधानिक नियमों के अनुसार, मौजूदा कार्यकाल खत्म होने से पहले ही नए चुनाव संपन्न हो जाने चाहिए थे. यानी यूपी में पंचायत चुनाव मई, 2026 से पहले या मई के महीने में ही होने तय थे.
















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