पुनीत शुक्ला, कानपुर।
कानपुर के दादानगर इंडस्ट्रियल एरिया में अब रूपानी चप्पल फैक्ट्री के श्रमिकों ने भी हड़ताल का बिगुल फूंक दिया जिसका सीधा मतलब यह कि पिछले 16 दिनों में यह 14 वीं कंपनी है जहाँ श्रमिक अशांति हो गयी. रूपानी चप्पल फैक्ट्री हड़ताल से अब यह आशंका मजबूत होती दिखायी देने लगी है कि कहीं ना कहीं से कुछ तो गड़बड़ है आखिर दादानगर की फैक्टरियों में ही क्यों हो रही हड़ताल? पनकी, चौबेपुर रानियां जैनपुर जैसे इंडस्ट्रियल एरिया में क्यों नहीं ऐसा हो रहा ? पिछले 15 दिनों के दौरान गोल्डी मसाले, नेरोलेक पेंट्स, ब्रिटानिया, PARLE-G जैसी नामी-गिरामी कंपनियों में स्ट्राइक करायी जा चुकी है.

सबसे आश्चर्यजनक और चौकाने वाली बात यह कि इन हड़तालों के पीछे कोई स्थापित श्रमिक संगठन नहीं, केवल फुटकरिए कर्मचारियों से ही करवायी जा रही है और आज की हड़ताल में भी वही सारी मांगे जो पिछले 15 दिनों की हड़ताल में रहीं. सैकड़ों कर्मचारी रूपानी कंपनी गेट के बाहर इकठ्ठे हो गए. कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर लंबे समय से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. कई बार शिकायत और मांग पत्र देने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी है.
कर्मचारी विक्की ने बताए हम लोगों की छुट्टी के समय गेट पर ताला डाल दिया जाता है जिसके बाद जबरदस्ती काम कराया जाता है. यदि कोई जरूरी काम है, जाने के लिए कहते है तो जाने नहीं देते है. जबरदस्ती नाइट में काम कराया जाता है. हम लोगों को सरकारी आदेश के अनुसार वेतन नहीं मिल रहा है जबकि PF और ESI भी नहीं मिल रहा है. यहां कोई बात सुनने के लिए तैयार नहीं है.
अखिलेश शुक्ला बताते है- हम लोगों को रोजदारी नौकरी कराई जा रहा है. हम लोगों को ओवर टाइम का दो गुना पैसा मिलना चाहिए लेकिन यहां सरकार के द्वारा जारी वेतन तक नहीं दिया जा रहा है. यहां हम लोग काम करते हुए बीमार पड जाते है तो दवाई और गर्मी में कूलर इत्यादि की कोई व्यवस्था तक नहीं है.
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर कंपनी प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की. हड़ताल के कारण कंपनी का कामकाज भी प्रभावित हुआ. कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर उचित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा.
















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